काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 308, कुल 942 में से
संदर्भ में पढ़ें| २९४ | काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम् |
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के ग्रन्थों में समावेश हुआ-हुआ मिलता है। इनमें से एफारिज नामक ग्रन्थ डाइक्ल्सि नामक विद्वान् द्वारा, आर्टीक्युलेशन नामक ग्रन्थ टेरियस विद्वान् द्वारा तथा दो तीन अन्य ग्रन्थ मेनन नामक विद्वान् द्वारा पहले से ज्ञात थे। नेचर ऑफ मैन नामक ग्रन्थ अरिष्टाटल¹ विद्वान् द्वारा ज्ञात था तथा वह भी उस ग्रन्थ को पालिवस का जानता था। यह निश्चय से नहीं कहा जा सकता कि अमुक ग्रन्थ हिपोक्रिटस की अपनी रचना है। ऐसा कोई भी ग्रन्थ नहीं मिलता है जिसे चिकित्सा विज्ञान के पिता हिपोक्रिटस की अपनी रचना कहा जा सके। उसके नाम से मिलने वाले ग्रन्थों का यदि संग्रह किया जाय तो सैकड़ों ग्रन्थ एकत्र हो सकते हैं जिनमें परस्पर विभिन्न तथा विरुद्ध विचार मिलते हैं। यह विभिन्न सम्प्रदाय वाले तथा ग्रीस देश के विभिन्न स्थान एवं विभिन्न काल वाले विद्वानों द्वारा लिखे गये अनेक ग्रन्थों का संग्रह प्रतीत होता है जिनका² समय छठी शताब्दी तक भी मिलता है। 'इनसाइक्लोपिडिया ब्रिटेनिका' में लिखा है कि रोमदेश में तृतीय ³शताब्दी ईस्वी पश्चात् तक के लिखे हुए कुछ ग्रन्थों का भी इसमें समावेश है। हिपोक्रिटस को महान् का पद दिया गया है। विलामाविज⁴ (Wilamowitz) का मत है कि बिना ग्रन्थ निर्माण के ही इसका नाम प्रचलित है। हिपोक्रिटसीय ग्रन्थों के अनुवाद की भूमिका⁵ में लिखा है कि अरिष्टाटल से पूर्व के कार्पस (Corpus) नामक ग्रन्थों के संग्रह में हिपोक्रिटस के लेख के न मिलने से प्रतीत होता है कि हिपीक्रिटस के नाम से प्रसिद्ध ग्रन्थों का लेखक हिपोक्रिटस नहीं है अपि तु पालिबस (Polybus) नामक अन्य ही विद्वान् है। पाश्चात्त्य विद्वानों की सम्मति है कि प्राचीन ग्रन्थों में भी समय प्रभाव से पाठविशेष, आवापोद्वाप प्रक्रिया द्वारा संस्करण तथा परिवर्धन आदि द्वारा बहुत से विकार उत्पन्न हो चुके हैं। हिपोक्रिटस के नाम से जो सैकड़ों ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं वे प्रायः छोटे-छोटे तथा एक-एक विषय का वर्णन करने वाले हैं। ईस्वी पश्चात् १३०-२०० समय में ग्यालन (Galen) नामक विद्वान् ने हिपोक्रिटस के नाम से प्रसिद्ध कुछ ग्रन्थों का विवरण दिया है। उसको भी हिपोक्रिटस के नाम से प्रसिद्ध ग्रन्थ रूपान्तरित⁶ अवस्था में ही मिले हैं। उपलब्ध ग्रन्थों में भी बहुत से ग्रन्थ एशिया माइनर से मिले हैं तथा एक दो ग्रन्थ सिसली प्रदेश से मिले हैं। इस प्रकार इन ग्रन्थों के पुरातन ग्रीसराज्य
१. इसकी टि. सं. उपो. पृ. ११४ में देखें।
२. इनमें से कौन से ग्रन्थ हिपोक्रिटस के हैं, इस प्रश्न का कोई निश्चित उत्तर नहीं दिया जा सकता है। ऐसा कोई ग्रन्थ नहीं है जिसके लिये हम पूर्ण विश्वास के साथ कह सकें कि यह चिकित्सा विज्ञान के पिता (Father of medicine) हिपोक्रिटस का है। उस संग्रह की पुस्तके जिनकी संख्या १०० के लगभग है, नाना प्रकार के तथा विरुद्ध विचार वाले भिन्न-भिन्न मतों के विद्वानों द्वारा लिखी गई हैं। ये विद्वान् ग्रीसदेश तथा ग्रीकसाहित्य में अत्यन्त भिन्न-भिन्न समय में हुए हैं तथा इनमें से किन्हीं-किन्हीं विद्वानों में तो परस्पर लगभग ५-६ सौ वर्ष तक का अन्तर है।
$$\text{ }$$(E. B. Vol XV P. 198)
३. बाद के और बहुत से आधुनिक ग्रन्थों का काल रोमन साम्राज्य के समय का है। इनमें से संभवतः बहुत से रोम में ईस्वी पश्चात् ३०० वर्ष तक के भी लिखे हुए है। (E.B. Vol XI P. 584)
४. विलामाविज कहता है कि बिना लेखों के ही प्रसिद्ध हिपोक्रिटस नाम का इस प्रकार का प्राचीन विवरण मिलता है।
$$\text{ }$$(Hippocrates Vol I P. XLIV)
५. अरिष्टाटल से पूर्व के कार्पस (Corpus) नामक ग्रन्थ संग्रह में हिपोक्रिटस के किसी लेख का उद्धरण नहीं मिलता है तथा वह इसका लेखक हिपोक्रिटस को नहीं अपि तु पालिबस को मानता है। वस्तुतः उस महान् चिकित्सक (हिपोक्रिटस) तथा उन लेखों के संग्रह को जिनमें उसका नाम आता है, हम निश्चयपूर्वक Cnidia के Ctesias, Carystus के Diocles तथा Menon से बाद का नहीं कह सकते। Ctesias तथा Diocles चतुर्थ शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हुए हैं तथा Menon अरिष्टाटल का शिष्य था। (Hippocrates Vol I Introdustion P.XLIV)
६. (a) इस संग्रह का मूल तो संदिग्ध है ही, तिसपर यह अपने रचनाकाल और गालन के मध्यवर्ती समय में अखण्डरूप में भी नहीं रहा है।
$$\text{ }$$(E. B. Vol XI P. 584)
(b) हिपोक्रिटस के इन संग्रहों में से सर्वप्रथम ग्रन्थ एशिया माइनर से तथा एक या दो ग्रन्थ संभवतः सिसली से मिले हैं। (E. B. Vol XI P. 584)