भारतकोश
काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

Kashyapa Samhita Hindi

महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा

स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished942 पृष्ठ

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पृष्ठ 324
३१०काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्

कुछ प्रदेश को जीत लेने पर भी यवनाधिपति अलेक्जेण्डर के शीघ्र भारत से लौट जाने में चिरकाल से थकी हुई अपनी सेना की अशान्ति ही केवल कारण प्रतीत नहीं होता है। अपितु जिस मार्ग से आये थे उसे छोड़कर नवीन समुद्र मार्ग से शीघ्र लौट जाने में मुद्राराक्षस की उक्ति के अनुसार कोई अन्य कारण भी प्रतीत होता है। भारत में आकर भी अलेक्जेण्डर के शीघ्र लौट जाने के उल्लेख से प्रतीत होता है कि चाणक्य नामक मन्त्री सहित चन्द्रगुप्त द्वारा शासित तथा समय-समय पर होने वाले आघातों को सहते हुए अपने पूर्व सम्प्रदाय की रक्षा में तत्पर भारत देश में उस समय यूनानियों का प्रभाव अधिक नहीं था।

विल ड्यूरण्ट¹ (Will Durant) नामक विद्वान् लिखता है कि ‘तक्षशिला, काशी, उज्जायिनी तथा विदर्भ आदि नगरों में भारतीय विश्वविद्यालय थे। अलेक्जेण्डर द्वारा तक्षशिला के आक्रमण के समय तक्षशिला सम्पूर्ण एशिया में सबसे उन्नत भारतीय विश्वविद्यालय था। वहां सम्पूर्ण कलाओं, सब विज्ञान, सैनिक विद्या तथा भैषज्य विद्या की शिक्षा देने वाले बहुत से बड़े-बड़े विद्वानों तथा देश देशान्तरों से आये हुए बहुत से विद्यार्थियों द्वारा समृद्ध महान् विश्वविद्यालय था। यह भारतीय विद्याओं के लिये अत्यन्त प्रसिद्ध स्थान हो गया था। अन्य सब विद्याओं की अपेक्षा भी इस विश्वविद्यालय की भैषज्य विद्या में विशेष प्रसिद्धि तथा प्रतिष्ठा थी’। एरियन (Arrian) नामक विद्वान् का भी कहना है कि ‘तक्षशिला अत्यन्त महान् तथा उन्नत नगरी थी’। स्मिथ² के अनुसार अलेक्जेण्डर का इतिहास लेखक एरियन (Arrian) नामक विद्वान् सिन्धु के समीपस्थ मूषक राज्य का वर्णन करते हुए लिखता है कि ‘उस देश के रहने वाले १३० वर्ष तक जीवित रहते थे। उनके इस दीर्घायुष्य का कारण परिमित आहार ही था। अन्य विद्याओं की अपेक्षा वे वैद्यक विद्या के अध्ययन में विशेष रुचि रखते थे’। मूषक प्रदेश में १३० वर्ष की आयु को असाधारण रूप में देकर, मूषक के उल्लेख द्वारा संभवतः अलेक्जेण्डर का सिन्धु प्रदेश तक आगमन सूचित किया है। स्ट्राबो³ (Strabo) नामक विद्वान् भी लिखता है कि (They do not persue accurate knowledge in any line except that of medicine' (अर्थात् उन्हें चिकित्सा विज्ञान के अतिरिक्त अन्य किसी भी विषय का सम्यक् ज्ञान नहीं था। पाथागोरस आदियों के इतिवृत्तों के द्वारा भारत में अध्यात्म आदि अन्य विद्याओं की भी उन्नति के स्पष्ट उल्लेख होने से, इस लेख से भी यही प्रकट होता है कि अन्य विद्याओं की अपेक्षा भैषज्य विद्या में भारतीय अधिक पूर्ण थे। अन्य साथ चलने की इच्छा वाले बहुत से भारतीय विद्वानों में से तक्षशिला से आदरपूर्वक साथ लाये हुए कल्याण (Plutarch reproduces as sphines but the Greeks called him Kalanos) नामक भारतीय विद्वान् का ग्रीसाधिपति अलेक्जेण्डर अन्य


१. (a) चन्द्रगुप्त के समय में उत्तरीय भारत के दो सौ प्राचीनतम नगरों में एक तक्षशिला था। एरियन ऐतिहासिक लिखता है कि ‘यह एक विशाल और समृद्ध नगर था। स्ट्राबो लिखता है कि यह बहुत विस्तृत नगर है तथा यहां के कानून बहुत अच्छे हैं’। यह नगर सेना और विद्या का केन्द्र था। ....... तत्कालीन भारत के कई एक विश्वविद्यालयों में यह सबसे अधिक विख्यात था। जिस प्रकार मध्ययुग में पेरिस में छात्रगण एकत्र होते थे उसी प्रकार तक्षशिला में बहुत से विद्यार्थी एकत्र हुआ करते थे। छात्र यहां के प्रसिद्ध गुरुओं के पास सभी प्रकार की कलाएं और ज्ञान विज्ञान सीखा करते थे। यहां का आयुर्वेद शिक्षालय सारे पूर्वीय जगत् में खूब प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध था (पृष्ठ ४४१-४४२)
(b) सिकन्दर के आक्रमण के समय तक्षशिला नगर विद्या के प्रमुख केन्द्र के रूप में समस्त एशिया में सर्वविदित था। अपने आयुर्वेद विद्यालय के लिये तो यह और भी अधिक प्रसिद्ध था।
(Story of Civilization-Will Durant P. 557)
२. वहां के निवासी एक सौ तीस वर्ष की उमर तक पहुंचते थे। उनका दीर्घायुष्य उनके सुस्वास्थ्य का परिणाम था जो कि आहार विषयक संयम से प्राप्त किया जाता था। (Early History of India-V. Smilt P. 105)
३. इसकी टि. सं. उपो. पृ. १३० में देखें।