काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 619, कुल 942 में से
संदर्भ में पढ़ेंधूपकल्पः ? ] कल्पस्थानम् २६१
अग्निस्त्वा धूपयतु, ब्रह्मा त्वा धूपयतु, शिवस्त्वा धूपयतु, वसवस्त्वा धूपयन्तु, रुद्रम्त्वा धूपयतु, आदित्यस्त्वा धूपयतु, मरुतस्त्वा धूपयन्तु, साध्यस्त्वा धूपयतु, देवा ऋभवस्त्वा धूपयन्तु, विश्वे त्वा देवा धूपयन्तु, सर्वे
(इति ताडपत्रपुस्तके १६८ तमं पत्रम्।)
त्वा देवा धूपयन्तु, छन्दांसि त्वा धूपयन्तु, पृथिवी त्वा धूपयतु, अन्तरिक्षं त्वा धूपयतु, द्यौस्त्वा धूपयतु, दिशस्त्वा धूपयन्तु, दिशां त्वा पतयो धूपयन्तु, देवीरापस्त्वा धूपयन्तु, शिवस्त्वा पवमानो धूपयतु, मित्रस्त्वा सविता सूर्यो धूपयतु, चन्द्रस्त्वा सोमो धूपयतु, नक्षत्राणि त्वा सुप्रजात्वाय धूपयन्तु, नक्षत्राणां त्वा देवताः सुमनसे धूपयन्तु, अहोरात्राणि त्वा शान्तये धूपयन्तु, ऋभवस्त्वा पुण्याय कर्मणे धूपयन्तु, संवत्सरास्त्वाऽऽयुषे ब्रह्मवर्चसे बलाय धूपयन्तु, प्रजापतिस्त्वा सुप्रजात्वाय धूपयतु, अश्विनौ त्वाऽऽरोग्याय दीर्घायुष्ट्वाय सहसे शेव(श्रेय)से धूपयंताम्, मातरस्त्वा स्नेहा धूपयन्तु, पितरस्त्वा तनोरच्छेदाय स्वधायै धूपयन्तु, कुमारस्त्वा कौमाराय वसवे धूपयतु, शाखस्त्वा यौवनाय धूपयतु, विशाखस्त्वा मध्याय वयसे धूपयतु, नैगमेषस्त्वा जरसे धूपयतु, सर्वे त्वा देवा दिव्यं धाम्ने धूपय तु, सर्वे त्वा ऋषयो ब्रह्मवर्चसाय धूपयन्तु, सर्वास्त्वा नद्यः सुपीताय धूपयन्तु, सर्वे त्वा पर्वताः स्थैर्याय धूपयन्तु, सर्वास्त्या ओषधोऽन्नाद्याय धूपयन्तु, सर्वे त्वा वनस्पतयः सुव्रतानां श्रेष्ठ्याय धूपयन्तु, सर्वे त्वा पशवः शक्त्यै शान्त्यै धूपयन्तु, सत्येन त्वा धूपयाम्यमृतेन त्वा धूपयाम्यृतसत्याभ्यां त्वा धूपयामि, नमो देवेभ्य इति जपेत्। इति ह स्माह भगवान् कश्यपः ।।
(इति कल्पस्थाने) धूपनकल्पः ।।
अग्नि तेरा धूपन करे, ब्रह्मा तेरा धूपन करे, शिव तेरा धूपन करे, वसु तेरा धूपन करें, रुद्र तेरा धूपन करे, आदित्य तेरा धूपन करे, मरुत् तेरा धूपन करें, साध्यदेवता तेरा धूपन करे, ऋभु देवता तेरा धूपन करें, विश्वे (ब्रह्माण्ड के) देवता तेरा धूपन करें, सर्वे (संकुचित क्षेत्र शरीर आदि के) देवता तेरा धूपन करें, छन्द (वेदमन्त्र) तेरा धूपन करें, पृथिवी देवता तेरा धूपन करे, अन्तरिक्ष तेरा धूपन करे, द्यौ तेरा धूपन करे, दिशाएं तेरा धूपन करें, दिशाओं के पति (अधिपति) तेरा धूपन करे, जलदेवता तेरा धूपन करे, पवित्र करने वाला शिव तेरा धूपन करे, मित्र, सविता तथा सूर्य नामक आदित्य तेरा धूपन करे, सोमनामक चन्द्रमा तेरा धूपन करे, नक्षत्र उत्तम सन्तान के लिये तेरा धूपन करें, नक्षत्रों के देवता उत्तम मन के लिये तेरा धूपन करें, दिन तथा रात्रि शान्ति के लिये तेरा धूपन करें, ऋभुदेवता पुण्यकर्म के लिये तेरा धूपन करें, संवत्सर (वर्ष) आयु, ब्रह्मतेज तथा बल के लिये तेरा धूपन करें, प्रजापति उत्तम सन्तान के लिये तेरा धूपन करें, अश्विदेवता आरोग्य, दीर्घायुष्य, बल तथा श्रेयस (सुख) के लिये तेरा धूपन करें, मातृदेवता स्नेह के लिये तेरा धूपन करें, पितर देवता शरीर के अक्षत रहने तथा स्वधा (अन्न) के लिये तेरा धूपन करें, कुमार (कार्तिकेय) कुमारावस्था तथा वसु (सम्पत्ति) के लिये तेरा धूपन करे, शाख देवता यौवन के लिये तेरा धूपन करे, विशाख मध्य आयु के लिये तेरा धूपन करे, नैगमेष जरा (चिरञ्जीविता) के लिये तेरा धूपन करे, सम्पूर्ण देवता दिव्य धाम (तेज) के लिये तेरा धूपन करें, सम्पूर्ण ऋषि ब्रह्मवर्चस् के लिये तेरा धूपन करें, संपूर्ण नदियां उत्तम पान के लिये तेरा धूपन करें, संपूर्ण पर्वत स्थैर्य (स्थिरता) के लिए तेरा धूपन करें, संपूर्ण ओषधियां अन्न के लिये तेरा धूपन करें, सम्पूर्ण वनस्पतियां उत्तम व्रतों की श्रेष्ठता के लिये तेरा