काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविषमज्वरनिर्देशीयाध्याय ? ] खिलस्थानम् ३४७
चिरानुबन्धी विषमो यथाकालं विवर्धते ।।४२।।
एकाहाच्च द्व्यहाच्चैव त्र्याहाच्चतुरहात्तथा ।
चिरानुबन्धी (चिरकालीन अनुबन्ध वाला-जीर्ण) विषमज्वर यथासमय एक, दो, तीन तथा चार दिन बाद वृद्धि को प्राप्त होता है।
**वक्तव्य—**आधुनिक विज्ञान के अनुसार हम विषमज्वर को Malarial fever कह सकते हैं। पाश्चात्य विज्ञान मलेरिया को एक Specific protozoon (Malarial parasite) द्वारा उत्पन्न हुआ मानता है। मादा Anopheline नामक मच्छर के काटने से इसका संक्रमण मनुष्यों में होता है। इस पराश्रयी (Parasite) के दो Life cycles होते हैं। १. मनुष्य में Asexual cycle तथा २. मच्छर में Sexual cycle । सर्वप्रथम मच्छर के काटने से मनुष्य के अन्दर Sporozoite प्रविष्ट हो जाता है। वह रक्तकणों में प्रविष्ट होकर धीरे २ बढ़ता जाता है तथा अन्त में Merozoites के रूप में आजाता है। इस प्रकार Parasite का Asexual cycle मनुष्य में पूर्ण हो जाता है। अब जब मनुष्य को पुनः मच्छर काटता है तब ये मच्छर के आमाशय में पहुंचकर फिर वृद्धि को प्राप्त होते हैं तथा धीरे २ बढ़कर पुनः Sporozoites की अवस्था में मच्छर की लालाग्रन्थियों में पहुंच जाते हैं। इस प्रकार Parasite का Sexual cycle मच्छर में पूर्ण हो जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि Parasite के दो Life cycle हैं। इसे हम निम्न तालिका से प्रकट कर सकते हैं—
Macrogametocyte Microgametocyte
│ │
Macrogamete Microgamete
└───┬─────────────┘
Sexual cycle │
(मच्छर में) Zygote
│
Oocyst
│
Sporozoites
│
Sporozoite मच्छर के काटनेसे प्रविष्ट
│
Asexual cycle Trophozoite
(मनुष्य में) │
Schizont
│
Merozoites
Malarial Parasite तीन प्रकार के होते हैं—
- Plasmodium Vivex 2. P. Malarial 3. P. Falsiparum.