भारतकोश
काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

Kashyapa Samhita Hindi

महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा

स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished942 पृष्ठ

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पृष्ठ 722

३६२ | काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम् | भेषज्योपक्रमणीयाध्यायः ३ ]

इसलिये आर्षयोगों के प्रक्षेप तथा अपचय (वृद्धि तथा ह्रास) में दोष तथा औषध के बलाबल को जाने बना प्रमाद नहीं करना चाहिये ।।७५।।

वयः शरीराग्निबलं त्ववेक्ष्य मतिमान् भिषक् । मात्रां विकल्पयेदत्र प्रधानावरमध्यतः ।।७६।।
बुद्धिमान चिकित्सक रोगी के शरीर तथा अग्निबल को देख कर प्रधान, अवर तथा मध्य के अनुसार मात्रा का निश्चय करे ।।

इति ज्वराणामुद्दिष्टो विशेषोऽयमुपक्रमे । यं विदित्वा तु कार्येषु विविधेषु न संभ्रमेत् ।।७७।।
इस प्रकार ज्वरों की चिकित्सा में यह विशेष क्रम कहा गया है । जिसे जानकर विविध कार्यों में मतिभ्रम उत्पन्न नहीं होता ।।७७।।

इति ह स्माह भगवान् कश्यपः ।।७८।।

चू¹ ह ७५
(इति खिलेषु) विशेषनिर्देशीयो नाम द्वितीयोऽध्यायः ।।
(इति ताडपत्रपुस्तके २०४ तमं पत्रम्)


ऐसा भगवान् कश्यप ने कहा था ।।७८।।
चू² ह ७५
(इति खिलेषु) विशेषनिर्देशीयो नाम द्वितीयोऽध्यायः ।।


भैषज्योपक्रमणीयस्तृतीयाध्यायः ।

अथातो भैषज्योपक्रमणीयमध्यायं व्याख्यास्यामः ।।१।।
इति ह स्माह भगवान् कश्यपः ।।२।।
अब हम भैषज्योपक्रमणीय अध्याय का व्याख्यान करेंगे । ऐसा भगवान् कश्यप ने कहा था ।।१-२।।
ब्राह्म्या श्रिया प्रज्वलन्तं ब्रह्मर्षिममितद्युतिम् । कश्यपं लोककर्तारं भार्गवः परिपृच्छति ।।३।।


१. 'चू' इति सप्ततेः, ह इति पञ्चकस्य अक्षराङ्कनिर्देशरीतिः प्राचीनपुस्तकेषु, तथैवात्रापि मूलताडपत्रपुस्तके एतदध्यायान्ते श्लोकमानमादाय अक्षराङ्कसङ्केतनिर्देशोऽयम्, आद्यन्तगद्यवाक्यवर्जमध्यगतश्लोकानामत्र ७५ संख्याऽस्ति, एवमेवाग्रेऽपि क्वचित् क्वचिदेवंविधाः संख्यासङ्केता दृश्यन्ते ।
२. प्राचीन पुस्तकों में 'चू' द्वारा ७० तथा 'ह' द्वारा ५ अक्षर के निर्देश की रीति है । उसी प्रकार यहां मूल ताडपत्र पुस्तक में भी इस अध्याय के अन्त में श्लोकों की संख्या के अनुसार यह अक्षरों का संकेत दिया गया है । आदि तथा अन्त के गद्य वाक्यों को छोड़कर बीच के श्लोकों की संख्या यहां ७५ है । इसी प्रकार आगे भी-कहीं २ ऐसी संख्याओं के सङ्केत दिये गये हैं ।