काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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काश्यपसंहिताया विषयानुक्रमणिका
सूत्रस्थानम् ।
| विषय | पृ. | ^१पं. | विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| लेहाध्यायः । | शुद्धक्षीरस्य लक्षणम् | १२ | ६ | ||
| लेहनविषये जीवकस्य प्रश्नाः | १ | १ | अशुद्धक्षीरसेवनदोषास्तेषां शान्तिश्च | १३ | १ |
| कश्यपस्योत्तरम् | २ | १ | वज्रस्य (स्तनकीलकस्य) संज्ञाहेतुसंप्राप्ति-लक्षणानि | १३ | ३ |
| गर्भिण्या रसधातोस्त्रिधा विभागः | २ | २ | वज्रस्य चिकित्सा | १४ | ५ |
| देहिनां प्रकृत्यभिनिर्वृत्तौ हेतुः | २ | ४ | नार्याः स्तनोपरि दुष्टदृष्टिपातस्तच्चिकित्सा च | १५ | २ |
| देहप्रकृतेर्भेदाः | २ | ४ | दन्तजन्मिकाध्यायः २० । | ||
| देहप्रकृत्याश्रिता भेषजकल्पना | ४ | १ | दन्तजन्मविषये जीवकस्य प्रश्नाः | १५ | ८ |
| वयोभेदेन बालेषु भेषजमात्रानिर्देशः | ४ | २ | कश्यपस्योत्तरम् | १६ | १ |
| लेहनायोग्या बालाः | ५ | ६ | दन्तानां भेदाः, संज्ञाः, उत्पत्तिकालश्च | १६ | १ |
| बालानां सात्म्यान्येवान्नपानान्युपयोज्यानि | ६ | १ | कुमारीणां कुमाराणां च दन्तजन्मनि विशेषः | १७ | १ |
| लेहनविधिः | ६ | ३ | दन्तानां निषेकोद्भेदादौ हेतुः | १७ | २ |
| बालानां सुवर्णप्राशनगुणाः | ६ | ५ | दन्तानां निषेककालः | १८ | १ |
| बालानां मेधाजनना लेहाः | ७ | २ | अप्रशस्तं दन्तजन्म, तच्छान्तिश्च | १८ | १ |
| बालानां लेहनार्थम् अभयं घृतम् | ७ | ६ | चतुर्विधं दन्तजन्म | १८ | ५ |
| बालानां लेहनार्थम् संवर्धनं घृतम् | ८ | ३ | सामुद्रसंवृतविवृतानां दोषाः | १८ | ५ |
| बालानां लेहनार्थम् ब्राह्मयाद्यं घृतम् | ८ | ५ | मासविशेषेण दन्तनिषेकस्य दोषा गुणाश्च | १८ | ७ |
| क्षीरोत्पत्त्यध्यायः १९ । | दन्तसंपत् | १८ | १० | ||
| स्कन्दादिग्रहदूषितधात्रीदुग्धलक्षणम् | ९ | १ | अप्रशस्ता दन्ताः | १८ | १२ |
| रसवर्णाभ्यां धात्र्याः क्षीरपरीक्षा | ९ | ५ | चूड़ाकरणीयाध्यायः २१ । | ||
| दुष्टक्षीरस्य संशोधनम् | ९ | ६ | कर्णपालीवर्धनोपायाः | २१ | १ |
| क्षीरवर्धनम् | १० | ५ | अभिषजः कर्णवेधननिषेधः | २१ | ४ |
| क्षीरविशोधनो गणः | १० | ८ | स्नेहाध्यायः २२ । | ||
| क्षीरशोधनकालिक आहारः | ११ | २ | स्नेहस्य योनिर्विकल्पाश्च | २३ | ३ |
| क्षीरसंशोधनकाले वर्जनीयानि | ११ | ३ | स्थावरस्नेहाः | २३ | ३ |
| क्षीर-प्रजनन-वर्धनानि | ११ | ४ |
१. अत्र सर्वत्र पङ्क्तिसंख्यागणनायां केवलं संस्कृतमूलश्लोकगद्यस्थितपङ्क्तीनामेव ग्रहणम् ।