काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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५६२ काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| विषय | पृ. | पं. | विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| औद्भिदाः स्नेहाः | २३ | ४ | जीर्णस्नेहलक्षणम् | ३३ | ३ |
| घृततैलवसामज्ज्ञां पूर्वपूर्वस्य श्रेष्ठत्वम् | २३ | ५ | स्नेहावपीडगुणाः | ३३ | ६ |
| घृतगुणाः | २४ | १ | स्नेहापचारजा रोगाः, तच्चिकित्सा च | ३३ | ८ |
| तैलगुणाः | २४ | ३ | स्नेहव्यापद्धेतुस्तच्चिकित्सा च | ३४ | ३ |
| मज्जावसोर्गुणाः | २४ | ४ | स्नेहविचारणायोग्या नराः | ३४ | ५ |
| तिलतैलघृतप्रयोगप्रशंसा | २४ | ५ | प्रमेहादिषु स्नेहने विशेषविधिः | ३४ | ८ |
| ऋतुविशेषेण स्नेहविशेषोपयोगः | २५ | १ | स्नेहनस्वेदनविशोधनक्रमः | ३५ | १ |
| स्नेहविशेषेणानुपानविशेषः | २५ | ३ | स्वेदाध्यायः २३ । | ||
| उष्णोदकानुपानगुणाः | २५ | ५ | स्वेदविषये जीवकस्य प्रश्नाः | ३५ | ४ |
| उष्णोदकनिर्माणविधिः | २५ | ६ | कश्यपस्योत्तरम् | ३५ | ७ |
| उष्णोदकानुपानं येषां निषिद्धम् | २५ | ७ | स्वेद्या नराः | ३५ | १० |
| ओदनादिभिः स्नेहप्रयोगविधानम् | २६ | १ | दोषविशेषेण स्वेदविशेषः | ३५ | ११ |
| प्रकृतिविशेषेण स्नेहप्रयोगकालः, ततोऽन्यथा प्रयोगे दोषाश्च | २६ | ३ | शरीरावयवविशेषे स्वेदविशेषः | ३६ | २ |
| स्नेहाच्छपाने त्रिविधा मात्रा, तद्योग्या नराश्च | २७ | १ | स्वेदनसमये नेत्रादिसंरक्षणविधिः | ३६ | ३ |
| त्रिविधस्नेहमात्राणां गुणाः | २८ | १ | स्वेदनिर्वर्तनकालः | ३७ | ३ |
| घृतपानयोग्या नराः | २८ | ५ | अतिस्विन्नस्य लक्षणं चिकित्सा च | ३७ | ४ |
| तैलपानयोग्याः नराः | २८ | ७ | मन्दस्विन्नस्य लक्षणं चिकित्सा च | ३७ | ८ |
| वसापानयोग्याः नराः | २९ | १ | सम्यक्स्विन्नस्य लक्षणम् | ३८ | १ |
| मज्जपानयोग्याः नराः | २९ | ३ | अस्वेद्या नराः | ३८ | ३ |
| स्नेह्याः नराः | २९ | ५ | स्वेद्या नराः | ३८ | ५ |
| अस्नेह्याः नराः | ३० | १ | स्वेदस्यादौ भेदाः | ३९ | २ |
| अस्नेह्यानामच्छस्नेहपानाद्दोषाः | ३० | ५ | हस्तस्वेदविधिः | ३९ | ३ |
| अस्निग्धस्य लक्षणम् | ३० | ७ | अवहितेन बालेषु स्वेदो योज्यः | ४० | १ |
| स्निग्धस्य लक्षणम् | ३० | ८ | प्रदेहस्वेदविधिः | ४० | ७ |
| अतिस्निग्धस्य लक्षणम् | ३० | ९ | नाडीस्वेदविधिः | ४१ | १ |
| स्नेहपानात् पूर्वदिने कर्तव्यम् | ३१ | १ | प्रस्तरस्वेदविधिः | ४१ | २ |
| स्नेहपीतस्य विहारः | ३१ | ३ | सङ्करस्वेदविधिः | ४२ | १ |
| कोष्ठभेदेन स्नेहनकालः | ३१ | ४ | उपनाहस्वेदविधिः | ४२ | ३ |
| मृदुकोष्ठस्य लक्षणम् | ३१ | ५ | उपकल्पनीयाध्यायः २४ । | ||
| अजीर्णस्नेहलक्षणम् | ३२ | ३ | सम्यक्शुद्धस्यान्नसंसर्जनक्रमः | ४३ | १ |
| स्नेहजीर्णाजीर्णविशङ्कायां चिकित्सा | ३२ | ४ | अन्नसंसर्जनक्रमव्यभिचारजा रोगाः | ४५ | ७ |
| तैलादीनामजीर्णे विशेषलक्षणानि | ३२ | ६ | शुद्धस्य शीतपानान्नादिसेवनजा रोगाः | ४६ | २ |
| स्नेहाजीर्णे चिकित्सा | ३३ | १ | सम्यग्जीर्णान्निलक्षणम् | ४६ | ३ |