काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
५६५
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| आसुरसत्त्वस्य लक्षणम् | ७६ | ६ |
| राक्षससत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | १ |
| पैशाचसत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | २ |
| सार्पसत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | ३ |
| याक्षसत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | ४ |
| भूतसत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | ५ |
| शाकुनसत्त्वस्य लक्षणम् | ७७ | ६ |
| राजससत्त्वस्य सामान्यलक्षण् | ७८ | १ |
| पाशवसत्त्वस्य लक्षणम् | ७८ | २ |
| मात्स्यसत्त्वस्य लक्षणम् | ७८ | ३ |
| वानस्पत्यसत्त्वस्य लक्षणम् | ७८ | ४ |
| तामससत्त्वस्य सामान्यलक्षणम् | ७८ | ५ |
| सत्त्वरजस्तमसां लक्षणानि | ७८ | ६ |
| सत्त्वानुरूपं देहिनामाचरणं तत्फलं च | ७९ | १ |
| समानसत्त्वाया धात्र्याः प्रशस्तत्वम् | ७९ | २ |
| नवविधसाराणां नामतो निर्देशः | ७९ | ४ |
| त्वक्सारबालस्य लक्षणम् | ७९ | ६ |
| रक्तसारबालस्य लक्षणम् | ७९ | ७ |
विमानस्थानम् ३ ।
कर्णायजयावळीवनं(?)विमानम् ? ।
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| अवेक्षितगदानां चिकित्सा | ८३ | १ |
शिष्योपक्रमणीयं विमानम् ? ।
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| शिष्योपनयनयोग्यः कालः | ८३ | ६ |
| शिष्योपनयनविधिः | ८३ | ८ |
| शिष्यगुणाः | ८५ | १ |
| गुरोर्गुणाः | ८५ | ४ |
| शिष्यानुशासनम् | ८६ | १ |
| अध्ययनविधिः | ८७ | १ |
| अनध्ययनकालाः | ८७ | ४ |
| अधीतायुर्वेदस्य कर्तव्यानि | ८७ | ८ |
| तद्विद्यसंभाषाविधिः | ८८ | ७ |
| आयुर्वेदविषये पञ्चदश प्रश्नाः | ८९ | १ |
| आयुषो लक्षणम् | ८९ | ४ |
| आयुर्वेदशब्दस्य निरुक्तिः | ८९ | ६ |
| आयुर्वेदस्याष्टावङ्गानि | ८९ | ८ |
| आयुर्वेदस्योत्पत्तिः | ८९ | १० |
| ब्राह्मणक्षत्रियवैश्यैः किमर्थमायुर्वेदोऽध्येयः | ८९ | १३ |
| कौमारभृत्यतन्त्रस्याष्टस्वङ्गेष्वाद्यत्वम् | ८९ | १८ |
| आयुर्वेदस्य पञ्चमवेदत्वप्रतिपादनम् | ९० | १ |
| आयुर्वेदस्य नित्यत्वप्रतिपादनम् | ९० | ६ |
| आयुर्वेदस्य वातपित्तकफाश्रयत्वप्रतिपादनम् | ९० | ८ |
| वातपित्तश्लेष्मप्रकृतीनां लक्षणानि | ९० | १० |
शारीरस्थानम् ४ ।
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| ऋतुविभागः | ९५ | १ |
| युगविभागेन कालविभागः | ९५ | ४ |
| *सृष्ट्युत्पत्तिक्रमः | ९७ | १ |
| अष्टौ प्रकृतयः | ९७ | १ |
| पञ्च बुद्धीन्द्रियाणि | ९७ | २ |
| पञ्च कर्मेन्द्रियाणि | ९७ | ३ |
| पञ्च इन्द्रियार्थाः | ९७ | ३ |
| मनसोऽतीन्द्रियत्वम् | ९७ | ३ |
| क्षेत्रक्षेत्रज्ञनिरूपणम् | ९७ | ४ |
| आत्मनो लिङ्गानि | ९७ | ५ |
| मनसो लक्षणम् | ९७ | ६ |
| पञ्चमहाभूतानि | ९७ | ८ |
| महाभूतानां गुणाः | ९७ | ८ |
| नव द्रव्याणि | ९७ | ९ |
| गुणानां द्रव्याश्रितत्वम् | ९७ | ९ |
| खादीनां विशिष्टा गुणाः | ९७ | १० |
| इन्द्रियाणां विप्रकृष्टसन्निकृष्टवृत्तित्वम् | ९७ | १० |
| सर्वेन्द्रियाणां स्पर्शनलक्षणत्वम् | ९७ | ११ |
असमानगोत्रीयशारीराध्यायः ?
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| गर्भाभिवृद्धिक्रमः, चतुर्थादिमासेषु गर्भिण्या लिङ्गानि च | १०२ | १ |
गर्भावक्रान्तिशारीराध्यायः ? ।
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| जीवस्य गर्भेऽवक्रमणम् | १०५ | १ |