काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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५६६ काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|
| गर्भस्य शरीरावयवाभिनिर्वृत्तिविषये जीवकस्य प्रश्नाः | १०५ | ४ |
| कश्यपस्योत्तरम् | १०५ | ७ |
| गर्भस्याकाशादिमहाभूतजाः शरीरावयवाः | १०५ | ८ |
| गर्भस्य मातृजाः | १०५ | १३ |
| गर्भस्य पितृजाः | १०५ | १४ |
| गर्भस्य आत्मजाः शारीरभावाः | १०५ | १५ |
| गर्भस्य सात्म्यजाः शारीरभावाः | १०५ | १७ |
| गर्भस्य रसजाः शारीरभावाः | १०५ | १८ |
| सत्त्वस्यौपपादुकत्वकथनम् | १०५ | १९ |
| हृदययकृत्प्लीहफुप्फुसनिरूपणम् | १०७ | १ |
| गर्भाशय-गुद-बस्तीनां निरूपणम् | १०७ | ३ |
| अष्टावाशयाः गर्भस्य मातृजाः पितृणाश्च धातवः | १०८ | १ |
| देहस्य षट्कोशवत्त्वम् | १०८ | २ |
| शरीरविचयशारीराध्यायः ? । | ||
| अवयवविभागेनास्थां गणना | १०८ | ३ |
| दश प्राणायतनानि | १११ | १ |
| त्रीणि महामर्माणि | १११ | ३ |
| कोष्ठाङ्गानि | ११२ | १ |
| प्रत्यङ्गानि | ११२ | ३ |
| द्विविधानि स्रोतांसि | ११३ | १ |
| दश मातृसिराः | ११३ | ४ |
| देहस्वरूपम् | ११४ | १ |
| धमन्यः | ११४ | ५ |
| रोमकूपानि | ११४ | ७ |
| रोमकूपेभ्यः स्वेदप्रवृत्तिः | ११४ | ९ |
| अञ्जलिप्रमेयाः शरीरधातवः | ११४ | १० |
| शुक्रप्रवृत्तिकालः | ११५ | ८ |
| महाभूतानामन्योऽन्याश्रयत्वम् | ११५ | ९ |
| देहावयवसौक्ष्म्यस्य सुदुर्वाचत्वम् | ११६ | २ |
| जातिसूत्रीयशारीराध्यायः ? । | ||
| स्वभावस्य मनुष्याद्याकृतिभेदनिर्वर्तकत्वम् | ११६ | ६ |
| शरीराभिनिर्वृत्तौ वायुपरमाणूनां कार्यम् | ११६ | ७ |
| स्वभावतः प्रजानिर्वृत्तौ स्त्रीपुंसयोरुपचार | ११६ | ८ |
| शुक्रशोणितयोरभिव्यक्तेः कालावेक्षितवम् | ११७ | १ |
| कदा शुक्रशोणिते पूर्णे भवतः | ११७ | ३ |
| ऋतुकालः | ११७ | ४ |
| पुत्रकामः कन्यार्थी च कदा स्त्रियमुपेयात् | ११८ | १ |
| गर्भाधानविधिः | ११९ | १ |
| पुत्रीया इष्टिः | ११९ | ६ |
| आहारस्य धातुपोषकत्वम् | १२१ | ३ |
| धातूनां धातुपोषकत्वम् | १२१ | ५ |
| धातूनां तत्समगुणैस्तत्पोषणम् | १२१ | ७ |
| गर्भिण्यै हितानि | १२३ | ३ |
| गर्भिण्या हितं वेश्म | १२३ | ४ |
| गर्भिण्या हिता चर्या | १२३ | ७ |
| आसन्नप्रसवाया लक्षणानि | १२३ | ११ |
| तत्र कर्तव्यानि | १२४ | १ |
| शीघ्रप्रसवकरा योगाः | १२६ | २ |
| प्रसवसमये कर्तव्यम् | १२६ | ४ |
| इन्द्रियस्थानम् ५ । | ||
| ओषधभेषजेन्द्रियाध्यायः १२ । | ||
| ओषधभेषजयोर्विशेषः | १३० | ३ |
| औषधभेषजयोर्गुणालाभेऽचिकित्स्यत्वं | १३० | ५ |
| मासान्तिकं रिष्टम् | १३१ | १ |
| मासार्धिकं | १३१ | २ |
| स्कन्दादिग्रहाबाधसूचकानि स्वप्नानि | १३१ | ९ |
| अफलाः स्वप्नाः | १३३ | ५ |
| फलवन्तः स्वप्नाः | १३४ | १ |
| दुःस्वप्नफलम् | १३४ | ३ |
| शुभं स्वप्नदर्शनम् | १३४ | ५ |
| दुःस्वप्नशान्तिः | १३५ | ७ |
| चिकित्सास्थानम् ६ । | ||
| ज्वरचिकित्साध्यायः ? । | ||
| ज्वरनिदानचिकित्साविषये जीवकस्य प्रश्नाः | १३७ | ३ |