काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
| विषय | पृ. | पं. | विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| गर्भिणीचिकित्सिताध्यायः ? । | वातोत्तरे प्लीहरोगे कतिपययोगाः | १५६ | ८ | ||
| परिकर्तिकाहरा योगाः | १४१ | १ | उदावर्तचिकित्सिताध्यायः ? । | ||
| प्रवाहिकाहरा योगाः | १४१ | ३ | आनानोदावर्त्तयोर्निदानपूर्विका संप्राप्तिः | १५८ | ३ |
| कामलाहरा योगाः | १४१ | १० | उदावर्त्तभेदाः | १५८ | ९ |
| हृच्छूलहरा योगाः | १४२ | १ | उदावर्त्तस्य सामान्यलक्षणानि | १५८ | ११ |
| त्वग्वातहरो योगः | १४२ | ५ | उदावर्त्तस्य पूर्वरूपाणि | १५८ | १४ |
| ऊर्ध्वानिलहरो योगः | १४२ | ७ | उदावर्त्तचिकित्सा | १५९ | १ |
| हिक्काश्वासहरो लेहः | १४२ | ८ | राजयक्ष्मचिकित्सिताध्यायः ? । | ||
| दीपनीयो योगः | १४२ | ९ | राजयक्ष्मणि पिप्पलीक्षीरम् | १६१ | १ |
| गर्भिण्याः पथ्यापथ्यम् | १४२ | १० | राजयक्ष्मणि पिप्पलीवर्धमानकम् | १६१ | ५ |
| दुष्प्रजाताचिकित्सिताध्यायः ? । | राजयक्ष्मणि नागबलाप्रयोगः | १६२ | ३ | ||
| दुष्प्रजातायाः सामान्यचिकित्सा | १४३ | ३ | राजयक्ष्मणि मण्डूकपर्णीशुण्टीब्राह्मीमधुकानां प्रयोगाः | १६२ | १० |
| दुष्प्रजाताव्याधीनां निदानम् | १४३ | ४ | राजयक्ष्मणि आजं रसायनम् | १६२ | १४ |
| दुष्प्रजाताव्याधीनां नामतो निर्देशः | १४४ | ३ | राजयक्ष्मणि महाभयारिष्टः | १६३ | १ |
| दुष्प्रजातारोगेषु त्रैवृत्तस्नेहः | १४४ | ८ | राजयक्ष्मणि इन्द्राणीघृतम् | १६३ | ८ |
| बालग्रहचिकित्सताध्यायः ? । | राजयक्ष्मणि लशुनप्रयोगः | १६३ | १० | ||
| रेवत्या वरप्राप्तिः | १४६ | ३ | राजयक्ष्मणि द्राक्षासर्पिः, पीलुघृतं च | १६४ | १ |
| रेवत्या विंशतिनामानि | १४७ | १ | राजयक्ष्मणि दैवव्यपाश्रयचिकित्सा | १६४ | ३ |
| रेवतीपूजनफलम् | १४८ | ४ | गुल्मचिकित्साध्यायः ? । | ||
| रेवतीरोषजनिता रोगाः | १४८ | ९ | गुल्मस्य भेदाः | १६५ | ३ |
| रेवत्याश्चिकित्सा | १४९ | १ | गुल्मस्य सामान्या संप्राप्तिः | १६५ | ४ |
| पूतनाग्रहोत्पत्तिः | १५० | ५ | वातगुल्मस्य निदानपूर्विका संप्राप्तिः | १६५ | ५ |
| पूतनाया नामानि | १५० | १२ | गुल्मानां पूर्वरूपम् | १६६ | १ |
| पूतनाया चिकित्सा | १५० | १४ | वातगुल्मस्य लक्षणम् | १६६ | २ |
| मुखमण्डिकाग्रहोत्पत्तिः | १५३ | १ | पित्तगुल्मस्य लक्षणम् | १६६ | ४ |
| मुखमण्डिकायाश्चिकित्सा | १५३ | ११ | कफगुल्मस्य लक्षणम् | १६६ | ५ |
| शीतपूतनार्दिते बाले चिकित्सा | १५४ | ६ | सान्निपातिकगुल्मस्य लक्षणम् | १६७ | १ |
| सर्वग्रहाणां सामान्य चिकित्सा | १५५ | ३ | रक्तगुल्मस्य निदानसंप्राप्तिलक्षणानि | १६७ | २ |
| प्लीहहलीमकचिकित्सिताध्यायः ? । | गुल्मस्य साध्यासाध्यविचारः | १६८ | १ | ||
| प्लीहवृद्धिलक्षणानि | १५५ | ११ | गुल्मस्य चिकित्सासूत्रम् | १६८ | २ |
| प्लीहवृद्धौ सामान्यचिकित्सा | १५६ | ४ | वातगुल्मे दशाङ्गं घृतम् | १६८ | ४ |
| प्लीहवृद्धौ आमलकीघृतम् | १५६ | ५ |