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काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
<div align="right">५७७</div>| विषय | पृ. | प | विषय | पृ. | प |
|---|---|---|---|---|---|
| विसर्पस्य सामान्यचिकित्सा | ४९९ | १ | शोथानां सामान्यचिकित्सा | ५२१ | ९ |
| वातजविसर्पस्य चिकित्सा | ४९९ | ४ | वातिकशोथस्य चिकित्सा | ५२४ | ६ |
| पैत्तिकविसर्पस्य चिकित्सा | ५०१ | ७ | पैत्तिकशोथस्य चिकित्सा | ५२५ | ११ |
| श्लैष्मिकविसर्पस्य चिकित्सा | ५०४ | ११ | कफजशोथस्य चिकित्सा | ५२६ | १३ |
| संसर्गजविसर्पस्य चिकित्सा | ५०६ | ११ | आगन्तुकशोथस्य चिकित्सा | ५२९ | ६ |
| चर्मदलचिकित्सिताध्यायः १५ । | शोथोपद्रवाः चिकित्सा | ५२९ | ७ | ||
| चर्मदलविषये वृद्धजीवकस्य प्रश्नाः | ५०७ | ५ | शूलचिकित्सिताध्यायः १८ । | ||
| कश्यपस्योत्तरम् | ५०८ | ३ | शूलस्य निदानपूर्विका संप्राप्तिः | ५३० | ३ |
| चर्मदलस्य निदानम् | ५०८ | ४ | शूलस्य वातजादिभेदेन लिङ्गानि | ५३० | ७ |
| महतां चर्मदलासंभवे हेतुः | ५०८ | ७ | वातिशूलस्य चिकित्सा | ५३० | ११ |
| चर्मदलभेदाः | ५०८ | ९ | पैत्तिकशूलस्य चिकित्सा | ५३१ | ४ |
| वातिकचर्मदलस्य निदानसंप्राप्तिपूर्वकं लक्षणम् | ५०९ | १ | श्लैष्मिकशूलस्य चिकित्सा | ५३१ | १२ |
| पैत्तिकचर्मदलस्य निदानसंप्राप्तिपूर्वकं लक्षणम् | ५०९ | ६ | शूले घृततैल्योः | ५३३ | ७ |
| श्लैष्मिकचर्मदलस्य निदानसंप्राप्तिपूर्वकं लक्षणम् | ५१० | १ | शूले बस्तियोगाः | ५३४ | ८ |
| सान्निपातिकचर्मदलस्य निदानसंप्राप्तिपूर्वकं लक्षणम् | ५१० | ७ | अष्टज्वरचिकित्सितोत्तराध्यायः १९ । | ||
| चर्मदलस्य साध्यासाध्यत्वविचारः | ५१० | ११ | वातज्वरहरा योगाः | ५३६ | ७ |
| वातिकचर्मदलस्य चिकित्सा | ५११ | १ | वातश्लेष्मज्वरहरा योगाः | ५३८ | ११ |
| पैत्तिकचर्मदलस्य चिकित्सा | ५११ | १२ | ज्वरे दोषविशेषेण चिकित्साविशेषः | ५४० | १ |
| श्लैष्मिकचर्मदलस्य चिकित्सा | ५१२ | १० | सन्निपातज्वरचिकित्सा | ५४० | ५ |
| अम्लपित्तचिकित्सिताध्यायः १६ । | मधुन उष्णयोगनिषेधः | ५४३ | २ | ||
| अम्लपित्तस्य निदानपूर्विका संप्राप्तिः | ५१४ | ३ | क्षीरगुणविशेषीयाध्यायः २० । | ||
| अम्लपित्तस्य लक्षणम् | ५१५ | ५ | क्षीरभेदाः | ५४४ | ४ |
| अम्लपित्तस्य चिकित्सा | ५१६ | १ | क्षीरसामान्यगुणाः | ५४४ | ७ |
| अम्लपित्तस्य उपद्रवाः | ५१८ | १० | गोक्षीरगुणाः | ५४५ | ३ |
| शोथचिकित्सिताध्यायः १७ । | महिषीक्षीरगुणाः | ५४६ | १३ | ||
| शोथस्य निदानम् | ५१९ | ४ | अजाक्षीणगुणाः | ५४७ | १ |
| शोथस्य भेदाः | ५१९ | ९ | उष्ट्रीक्षीरगुण | ५४७ | ४ |
| शोथानां वातजादिभेदेन लिङ्गानि | ५२० | २ | पानीयगुणविशेषीयाध्यायः २१ । | ||
| शोथानां असाध्यलिङ्गानि | ५२१ | ८ | हंसोदकगुणाः | ५४८ | १ |
| ऋतुभेदेनोदकगुणाः | ५४८ | ४ | |||
| अप्रशस्तं जलं | ५४९ | १ | |||
| आन्तरिक्षजलगुणाः | ५४९ | ३ | |||
| देशभेदेन नदीगुणाः | ५४९ | ६ |
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५७८ काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| विषय | पृ. | प | विषय | पृ. | प |
|---|---|---|---|---|---|
| औद्भित्पदिजलगुणाः | ५४९ | ९ | नानाविधपशुपक्षिणां | ५५४ | २ |
| पानार्हं जलं | ५५० | १ | नानाविधजलचरमांसगुणाः | ५५६ | ३ |
| पानायोग्यं जलं | ५५० | ३ | मांसवर्गेषु श्रेष्ठाः प्राणिनः | ५५७ | ५ |
| भक्तादिमध्यान्तपीतजलगुणाः | ५५० | १२ | शरीरावयवेषु गुरुलघुत्वम् | ५५७ | ९ |
| शृतशीतजलगुणाः | ५५१ | १ | अवस्थाविशेषेण गुरुलघुत्वम् | ५५८ | १ |
| ऋतुभेदे पेयं जलं | ५५१ | ७ | शरीर-भोजन-देशादिविशेषेण | ५५८ | ४ |
| मांसगुणविशेषीयाध्यायः २२ । | देशसात्म्याध्यायः २३ । | ||||
| मांससामान्यगुणः | ५५२ | ३ | मध्यदेशः, तज्जानां सात्म्यं च | ५५९ | ३ |
| मांसरसगुणाः | ५५२ | ८ | पूर्वदेशाः, तज्जानां सात्म्यं च | ५५९ | ८ |
| संस्कारविशेषेण मांसगुणाः | ५५३ | ६ | दक्षिणदेशाः, तज्जानां सात्म्यं च | ५६० | ३ |
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॥ अन्य महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ ॥
- अष्टाङ्गहृदयम्। अरुणदत्त कृत। सटिप्पण 'सर्वाङ्गसुन्दरी' तथा हेमाद्रिकृत 'आयुर्वेदरसायन' व्याख्या सहित। सम्पा. वैद्य हरिशास्त्र पराड़कर। (का. 315)
- सुश्रुत संहिता। श्रीडल्हणाचार्य विरचित निबन्धसंग्रहव्याख्या सहित। सम्पादक - यादवजीत्रिक्रमजी आचार्य (का. 316)
- चरक संहिता - महर्षि पुनर्वसुनोपदिष्टा, तच्छिष्येणाग्निवेशेन प्रणीता, चरकदृढ़बलाभ्यां प्रति संस्कृत श्री चक्रपाणिदत्त विरचितया आयुर्वेद दीपिका व्याख्या संवलिता। आचार्योपाह्वेन त्रिक्रमात्मजेन यादवशर्मणा संशोधिता (MIS 54)
- शार्ङ्गधर संहिता। शार्ङ्गधराचार्य प्रणीत। भिषग्वर आढमल्ल विरचित 'दिपिका' प. काशीनाथ वैद्य प्रणीत 'गूढार्थदीपिका' टीका एवं पण्डित परशुराम शास्त्री संशोधित। (MIS 44)
- माधवनिदानम्। माधवकर कृत। विजयरक्षित तथा कण्ठदत्त कृत 'मधुकोष' संस्कृत टीका तथा ब्रह्मशंकर शास्त्री कृत 'मनोरमा' हिन्दी टीका (का. 159)
- रसरत्नसमुच्चय। श्री वाग्भट्टाचार्य कृत। संस्कृत मूल, 'रसप्रभा' हिन्दी टीका, टिप्पणीयुक्त। डॉ. इन्द्रदेव त्रिपाठी। (चौ.सं.भ. 12)
- गदनिग्रहः। सोढ़ल कृत। इन्द्रदेव त्रिपाठी कृत 'विद्योतिनी' हिन्दी टीका। सं. गंगा सहाय पाण्डेय।
(1-3 भाग) सम्पूर्ण (का. 182) - गुणरत्नमाला। भावमिश्र कृत। डॉ. कैलाशपति पाण्डेय एवम् डॉ. अनुग्रह नारायण
सिंह कृत 'प्रकाश' हिन्दी व्याख्या व सम्पादन। प्राक्कथन आचार्य प्रियव्रत शर्मा कृत (चौ.सं.भ. 63) - चरक संहिता। अग्निवेश कृत। चरक एवं दृढ़बल संशोधित। 'चक्रपाणि दत्त' कृत 'आयुर्वेद दीपिका'
टीका तथा काशीनाथ शास्त्री कृत 'विद्योतिनी' हिन्दी टीका।
सं.-गंगासहाय पाण्डेय। प्रियव्रत शर्मा कृत भूमिका। (1-2 भाग) सम्पूर्ण (का. 194) - द्रव्यगुणसूत्रम्। (Aphorisms on Dravyaguna). डॉ. प्रियव्रत शर्मा कृत स्वोपज्ञभाष्य
(With English Translation) हिन्दी अनुवाद डॉ. सत्यदेव दूबे (चौ.सं.भ. 1) - वनौषधि चन्द्रोदय। चन्द्रराज भण्डारी कृत। (1-10) भाग 2 जिल्द में सम्पूर्ण (का. 161)
- सुश्रुत संहिता। महर्षि सुश्रुत कृत। अम्बिका दत्त शास्त्री आदि कृत 'आयुर्वेद तत्व
संदीपिका' हिन्दी टीकादि। पी. एम. मेहता कृत प्रस्तावना। (1-2 भाग) सम्पूर्ण (का. 156) - Encyclopaedic Dictionary of Ayurveda. by Dr. Kanjiv Lochan & Dr. P.S. Byadgi (MIS 36)
- Bhaisajya Ratnavali. Composed by Govinda Das Ji Bhisagratna. Commented upon Dr. Ambika Datta Shastri. Eng. Trans. Dr. Kanjiv lochan and Technically reviewed by Dr. Anand K. Choudhary (Vol. 1-3) Complete (C.S.B. 67)
- Rasendra Sara Sangrah of Sri Gopala Krishna Bhatt. Text with English Translation 'Parimita Bhodhini' Commentary & Appendix Dr. P. Suresh & Dr. D. Vinaya Kumari Dhannapuneni (C.S.B. 72)
- Vikriti Vijnana and Roga Vijnana (Ayurvediya). by P.S. Byadgi
Vol. - I (Vikriti Vijnana) & Vol. - II (Roga Vijnana) (MIS 3)
CHAUKHAMBHA SANSKRIT SANSTHAN, VARANASI (U.P.) INDIA
E-mail : cssvns@gmail.com
ISBN : 81-86937-67-6