भारतकोश
कात्यायन श्रौतसूत्रम् (शुक्ल यजुर्वेद काण्व-माध्यन्दिनीय श्रौत-कर्मकाण्ड सटीक)

कात्यायन श्रौतसूत्रम् (शुक्ल यजुर्वेद काण्व-माध्यन्दिनीय श्रौत-कर्मकाण्ड सटीक)

Katyayana Shrautasutram of Shukla Yajurveda with Commentary

महर्षि कात्यायन (भाष्य: याज्ञिक श्रीदेव) द्वारा

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->तस्मिन्पक्षे. Let's write तस्मिन्पक्षे(orतस्मिन्यक्षे? No, 'तस्मिन्यक्षे' makes no sense in Sanskrit, 'पक्षे' is the universal word for 'in that pakṣa/view', contrast with 'एकमेवेदं सूत्रम्... एके आचार्या विकल्पेन... अत एवंविधमेकीयमतम्—यदेकविंशतिकाष्ठक इध्मः । तस्मिन्पक्षे चेध्मादेव त्रीणि काष्ठान्यादाय परिधिपरिधानमिति ॥'). * It is definitely तस्मिन्पक्षे. * Line 18: देव त्रीणि काष्ठान्यादाय परिधिपरिधानमिति ॥ * Line 19:बन्धनान्तरमिध्मबर्हिषोर्भूयौ निधानं न कार्यम् । आपस्तम्बसूत्रे “अनधो * Wait! Let's re-examineभूयौvsभूमौ! * Look at बन्धनान्तरमिध्मबर्हिषोर्भूयौvsभूमौ: * Wait, look at the letter: is it or? * Wait! Look at inकार्यम्: it has the notch on the left! * In भू...: it has य`