कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)
Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation
स्वामी महेश्वरानन्द गिरि द्वारा
स्रोत: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४३ करता हूँ। जो इस प्रकार उपासना करता है वह सब भूतों का राजा होता है' ।।४।। स होवाच बालाक्यि एवैष चन्द्रमसि पुरुषस्तमेवाहं ब्रह्मोपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठाः सोमो राजाऽन्नस्यात्मेति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्तेऽन्नस्यात्मा भवति ।।५।। बालाकि बोला, “चन्द्र में जो पुरुष है उसकी मैं उपासना करता हूँ।” अजातशत्रु ने कहा, “इस विषय में तू मुझसे संवाद मत कर। वह सोम राजा है तथा अन्न का आत्मा (जीवन) है ऐसा मान कर मैं उनकी उपासना करता हूँ इस प्रकार उपासना करने वाला मनुष्य अन्न का आत्मा होता है; यानी उसे अन्न की कमी नहीं होती” ।।५।। स होवाच बालाकिर्य एवैष विद्युति पुरुष एतेवाहं ब्रह्मोपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठास्तेजस्यात्मेति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्ते तेजस आत्मा भवति ।।६।। बालाकि बोला, “जो विद्युत् में पुरुष है उसी की मैं ब्रह्मरूप से उपासना करता हूँ।” तब अजातशत्रु ने कहा, “इस विषय में तू मुझसे संवाद मत कर। वह तेज का आत्मा है ऐसा मानकर मैं उसकी उपासना करता हूँ। जो इस प्रकार उपासना करता है वह तेज का आत्मा होता है” ।।६।। स होवाच बालाकिर्य एवैष स्तनयित्नौ पुरुष एतमेवाहं ब्रह्मोपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठाः शब्दस्यात्मेतिवा अहमेतमु पास इति स यो हैतमेवमुपास्ते शब्दस्यात्मा भवति ।।७।। बालाकि बोला, “मेघ गर्जना में जो पुरुष है उसकी मैं ब्रह्मरूप