भारतकोश
कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद् (हिन्दी अनुवाद सहित)

Kaushitaki Brahmana Upanishad with Hindi Translation

स्वामी महेश्वरानन्द गिरि द्वारा

स्रोत: मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली · मेहता चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished56 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 56 में से

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४५ ऐसा समझ कर मैं उसकी उपासना करता हूँ। इस प्रकार इसकी उपासना करने वाला विजयी दुर्जय तथा शत्रुओं को जीतने वाला होता है” ।।११।। स होवाचबालाकिर्य एवैषोऽग्नौ पुरुषस्तमेवाहमुपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठ विषासहिरिति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्ते विषसहिर्वा एष भवति ।।१२।। बालाकि बोला, “अग्नि में जो पुरुष है उसकी मैं उपासना करता हूँ।” अजातशत्रु ने कहा, ‘इस संबंध में तू मुझसे संवाद मत कर। वह प्रबल है ऐसा समझ कर मैं उसकी उपासना करता हूँ। इस प्रकार जो इसकी उपासना करता है वह प्रबल होता है” ।।१२।। स होवाच बालाकिर्य एवैषोऽप्सु पुरुषस्त मेवाहमुपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठा नाम्न आत्मेति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतेवमुपास्ते नाम्न आत्मा भवतीत्य- धिदैवतमथाध्यात्मम् ।।१३।। बालाकि बोला, “जल में जो पुरुष है उसकी मैं उपासना करता हूँ।” अजातशत्रु ने कहा, इस विषय में तू मुझसे संवाद मत कर यह नाम स्वरूप (अथवा तेज स्वरूप) है ऐसा समझ कर मैं इसकी उपासना करता हूँ। जो इसकी इस प्रकार उपासना करता है वह नाम स्वरूप (अथवा तेज स्वरूप) होता है ।” इतना देवता सम्बन्धी हुआ, अब शरीर सम्बन्धी कहते हैं ।।१३।। स होवाच बालाकिर्य एवैष आदर्शे पुरुषस्तमेवाहमुपास इति तं होवाचाजातशत्रुर्मामैतस्मिन्सम्वादयिष्ठा प्रतिरूप इति वा अहमेतमुपास इति स यो हैतमेवमुपास्ते प्रतिरूपो हैवास्य

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