कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । श्वतरीमूत्रमश्ममण्डलाभ्यां संघृष्य भक्तेऽलंकारे ॥३३॥ सीमन्तमन्वीक्षते ॥३४॥ अपि वृश्चेति जायायै जारमन्वाह ॥३५॥ क्लीबपदे बाधकं धनुर्वृश्चति ॥३६॥ आशयेऽश्मानं प्रहरति ॥३७॥ तृष्टिक इति बाणापर्णीम् ॥३८॥ आ ते दद इति मन्त्रोक्तानि संस्पृशति ॥३९॥ अपि चान्वाहापि चान्वाह ॥ ४० ॥ १२ ॥ ३६ ॥ इत्यथर्ववेदे कौशिकसूत्रे चतुर्थोध्यायः समाप्तः ॥४॥ अम्बयो यन्तीति क्षीरौदनोत्क्रुचस्तम्बपाटाविज्ञानानि साथ पत्थर को घिसकर अभिमंत्रण कर भात के साथ उसे खाने को देवे ॥ या अलंकार में देवे ॥ ३३॥ अब वन्ध्याकरण को कहते हैं । स्त्री के सीमन्त को देखे ॥ ३४ ॥ अपि वृश्च० ॥ तीन ऋ० से जाया के लिये जार को कहे ॥ ३५ ॥ “क्लीबपदे बाधकं धनुर्वृश्चति” पढकर जार के सांकेतिक स्थान में पत्थर फेके ॥३६॥३७॥ तृष्टिक०” पढ़कर शरपुंख भी वहीं फेके॥३८॥“आ ते दद् ०” मंत्रसे जार के हृदय, मुखको स्पर्श करे ॥ ३६ ॥ और उसे कहे । और उसे कहे ॥ ४० ॥ १२ ॥३६॥ यह छत्तीसवी कण्डिका पुरी हुई ॥ अथर्व वेद के कौशिक सूत्र के चौथे अध्याय का भाषानुवाद भी समाप्त हुआ ॥ ४ ॥ अब विज्ञान कर्मों के विधि को कहते हैं ॥ लाभ, हानि, जीत, हार, सुख, दुःख, उत्कर्ष, अपकर्ष, सुभिक्ष, दुर्भिक्ष, भय, अभय, रोग, आरोग्य डर है या नहीं, धन, अधन, धर्म, अधर्म, मरण, अमरण, धान्य होगा ? या नहीं । खेत होगा ? या नहीं, घर में वास होगा ? या नहीं, धान्य, पुत्र, पशु, हिरण्य, और वस्त्र । विद्या, शास्त्र आदि का लाभ होगा ? या नहीं, जीना, मरना, जाना, आना, बल, अबल । सत्, असत् के योग से रोगी का जीवन, मरण, प्रसव में पुत्र योग से पुत्र का होना, धर्म, अधर्म के योग से मित्र, अमित्र के संयोग से होना । ग्राम है या नहीं, पुरुष का विवाह है या नहीं, वर्ष भर में, मास में सुभगा या दुर्भगा होगी या नहीं, घर, ग्राम, आदि होंगे या नहीं ? आधान होगा या नहीं, इत्यादि विचार मन या वचन से भली-भाँति चिन्तन कर उस कर्म को करना चाहिये ॥ “अम्बयो यन्ति०” सूक्त से रिंधते हुए