भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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१२८ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । प्रसूनानुकुद्रीचीशफान् पराचीनमूलान् ॥२२॥१॥५०॥ उदित इति खादिरं शङ्कं सम्पातवन्तमुद्बृहन्नि- खनन्गा अनुव्रजति ॥१॥ निनयनं समुह्य चारे सारूप- वत्सस्येन्द्राय त्रिर्जुहोति ॥२॥ दिश्यान् बलीन् हरति ॥३॥ प्रतिदिशमुपतिष्ठते ॥४॥ मध्ये पञ्चममनिर्दिष्टम् ॥५॥ शेषं निनयति ॥६॥ ब्रह्म जज्ञानं भवाशर्वावित्या- सन्नमरण्ये पर्वतं यजते ॥७॥ अन्यस्मिन् भवशर्वपशुप- खेत में गाड़ देवे ॥२०॥ गोबर को अग्नि में डाले ॥२१॥ चिड़चिड़ी के फूल को "येऽस्यां स्थ०" से अभिमंत्रण करके घर में बिछावे, और घर के द्वार पर गाड़ देवे । ग्राम में गाड़ देवे । गुडूची को अभिमंत्रण कर के भाँति २ का काम करे । घर में बिछावे, अभिमंत्रण कर गाड़ देवे । गुडूची के डाढ़ या जड़ को अग्नि में आहुति करे और प्राचीन मूल नामक बूटी को भी इस प्रकार व्यवहार करे ॥२२॥१॥५०॥ यह पचा- सर्वी कण्डिका समाप्त हुई ।। व्याघ्र, चोर, वृक, चरक, सिंह, आदि बन के हिंसक जन्तुओं के भय निवृत्ति के लिये स्वस्त्ययन करे । कल्याण चाहने वाला जब घर से बाहर वन आदि होकर जावे तो गौ को आगे करके उसके पीछे कीलक गाड़ता, उसको उखाड़ता जावे ॥१॥ जल के घड़े को अभिमंत्रण करके गौ के आने जाने मार्ग में लावे और पांसुकूट की क्रिया करके उसके आधे भाग को दहिने हाथ से फेके । सारूपवत्सा गौ के घृत से इन्द्रदेव के लिये आहुतियाँ देवे ॥२॥ प्रत्येक दिशा में बलियों को देवे । और "येऽस्यां स्थ०" सूक्त के प्रत्येक ऋचाओं से प्रत्येक दिशाओं का उपस्थान करे ॥३॥४॥ मध्य भाग में पांचवीं बलि देवे ॥५॥ "ब्रह्म जज्ञानं०" और "भवाशर्वौ०" से पर्वत देवता के लिये जंगल में पाकयज्ञ विधान से आज्यभाग तक करके "ब्रह्म जज्ञानमनाप्ता०" इत्यादि सूक्त से आहुति देवे । "हिमवते त्वा जुष्टं निर्वपामि०" इत्यादि आहुति करे । और निकट के पर्वत का यज्ञ करे "भवाशर्वौ मृडतं०" इस अर्ध सूक्त से चरु की आहुति देवे । "भवाय जुष्टं निर्वपामि०" इत्यादि ॥६॥७॥ भवशर्व आदि देवों के लिये पृथक् निर्वाप न करके बड़े भाण्ड में पकावे । ये सात पर्वत देवता हैं । व्याघ्र, चोर, वृश्चिक, हाथी, बन की गौ