भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 187, कुल 361 में से

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पृष्ठ 187

अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । १५५ सादयति ॥ शुद्धाः पूता इति मन्त्रोक्तम् ॥ ४ ॥ पक्कं क्षेत्राद्धर्षं वनुष्वेत्यपकर्षति ॥ ५ ॥ अग्नौ तुषानिति तुषानावपति ॥ ६ ॥ परः कम्बूकानीति सव्येन पादेन फलीकरणानपोहति ॥ ७ ॥ तन्वं स्वर्ग इत्यन्यानावपति ॥ ८ ॥ अग्ने प्रेहि समाचिनुष्वेत्याज्यं जुहुयात् ॥ ९ ॥ एष सवानां संस्कारः ॥ १० ॥ अर्थलुप्तानि निवर्तन्ते ॥ ११ ॥ यथासवं मन्त्रं सन्नमयति ॥ १२ ॥ लिङ्गं परि- हितस्य लिङ्गस्यानन्तरं कर्मकर्मानुपूर्वेण लिङ्गं परीक्षेत ॥ १३॥ लिङ्गेन वा ॥१४॥ कर्मोत्पत्त्यानुपूर्वं प्रशस्तम् ॥१५॥ अतथोत्पत्तेर्यथालिङ्गम् ॥ १६ ॥ समुच्चयस्तुल्यार्थानां विकल्पो वा ॥ १७ ॥ अथैतयोर्विभागः ॥ १८ ॥ सूक्तेन पूर्वं सम्पातवन्तं करोति ॥ १९ ॥ श्राम्पत इतिप्रभृ- तिभिर्वा सूक्तेनाभिमन्त्र्याभिनिगद्य दद्याद्दाता वाच्य- पास रक्खे ॥३॥ “शुद्धाः पूताः०” से मंत्रोक्त क्रिया करे ॥४॥ “पक्कं- क्षेत्राद्धर्षं वनुषु०” से अपकर्षण करे ॥५॥ “अग्नौ तुषान्०” से अग्नि में तुषों को डाले ॥६॥ “परः कम्बूकान्०” से वाम पग से फली करण को दूर करे ॥७॥ “तन्वं स्वर्ग” से अन्य वस्तुयें जो उसमें हों निकाल फेके ॥८॥ “अग्ने प्रेहि०” से आज्य की आहुति करे ॥९॥ अब दाता ऋत्विजों को व्रत निवेदन करके साविक व्रत को तीन रात्रि यथा शास्त्र विहित इत्यादि ऋत्विगगण सुनावें । यह सबों का संस्कार है ॥१०॥ अर्थ लुप्तों की निवृत्ति हुई ॥११॥ सवके अनुसार मंत्र को संयमन करे ॥१२॥ लिङ्ग परिहित का, लिङ्ग के अनन्तर कर्म और कर्मानुपूर्व से लिङ्ग की परीक्षा करे ॥१३॥ या लिङ्ग से ही परीक्षा करे ॥१४॥ कर्म की उत्पत्ति के अनुपूर्व परीक्षा करना अच्छा है ॥१५॥ कर्म की उत्पत्ति यदि असत्य हो तो लिङ्गानुसार परीक्षा करे ॥१६॥ या एक ही अर्थवालों के समुच्चय से विकल्प पक्ष माने ॥१७॥ अब इन दोनों पक्षों के विभाग को कहते हैं॥१८॥ सूक्त से पहिले सम्पातवन्त करे ॥१९॥ या “श्राम्पत” इत्यादि से करे । सूक्त से अभिमंत्रण करके, निगद करके वाच्यमान्

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