भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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पृष्ठ 205

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Let's verify line by line: अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । १७३ ॥५॥ वैश्वदेवीमिति वत्सतरीमालम्भयति ॥६॥ इममि- न्द्रमिति वृषम् ॥७॥ अनड्वाहमहोरात्रे इति तल्पमा- लम्भयति ॥ ८ ॥ आरोहतायुरित्यारोहति ॥६॥ आसी- ना इत्यासीनामनुमन्त्रयते ॥१०॥ पिञ्जूलीराञ्जनं सर्पिषि पर्यस्येमा नारीरिति स्त्रीभ्यः प्रयच्छति ॥११॥ इमे जीवा अविधवाः सुजामय इति पुम्भ्य एकैकस्मै तिस्र- स्तिस्रस्ता अध्यध्युदधानं परिव

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