भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 361 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 207

An exact line-by-line transcription of the page into Markdown in Unicode Devanagari:

घृताहुतिं त्वा वयमक्रव्याहुतिमुपनिषदैम जातवेद इति चतुर उदपात्रे सम्पातानानीय ॥३२॥ तानुल्लुप्य ॥३३॥ पुर- स्तादग्नेः प्रत्यङ्ङासीनो जुहोति । हुते रमस्व हुतभाग एधि मृडास्मभ्यं मोत हिंसीः पशून्न इति ॥३४॥ यद्युद्वा- याद्भस्मनारणिं संस्पृश्य तूष्णीं मथित्त्वोद्दीप्य ॥३५॥ पूर्ण- होमं हुत्वा ॥३६॥ संनतिभिराज्यं जुहुयाद् व्याहृतिभि- र्वा ॥३७॥ संसृष्टे चैवं जुहुयात् ॥३८॥ अग्नावनुगते जाय- माने ॥३९॥ आनडुहेन शकृत्पिण्डेनाग्न्यायतनानि परि- लिप्य ॥४०॥ होम्यमुपसाद्य ॥४१॥ प्राणापानाभ्यां स्वाहा समानव्यानाभ्यां स्वाहोदानरूपाभ्यां स्वाहेत्यात्मन्येव जुहु