भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 361 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 51

अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । १९ दिश्यान् बलीन् हरति ॥ ३॥ प्रतिदिशमुपतिष्ठते ॥ ४ ॥ सर्वत्राधिकरणं कर्तुर्द्दक्षिणा ॥ ५ ॥ त्रिरुदकक्रिया ॥६॥ अनन्तराणि समानानि युक्तानि ॥७॥शान्तं संभारम् ॥८॥ अधिकृतस्य सर्वम् ॥९॥ विषये यथान्तरम् ॥१०॥ प्रयच्छ पर्शुमिति दर्भलवनं प्रयच्छति ॥ ११ ॥ अरातीयोरिति तक्षति ॥१२॥ यत्त्वा शिक इति प्रक्षालयति ॥१३॥ यद्य- त्कृष्ण इति मन्त्रोक्तम् ॥ १४ ॥ पलाशोदुम्बरजम्बुकाम्पी- लस्रग्वङ्गशिरीषस्रक्त्यवरणबिल्वजङ्गिडकुटकगर्हगलावल- वेतसशिम्बलसिपुनस्यन्दनारणिकाश्मयोक्ततुन्युपूतदार- वः शान्ताः ॥ १५ ॥ चितिप्रायश्चित्तिशमीशमका- ॥२॥ स्वस्त्ययन याग देवताओं के लिये प्रत्येक दिशाओं में बलि, उपहार देवे और प्रति दिशा में उपस्थान करे ॥३॥४॥ सब ही यज्ञकर्त्ता क दक्षिणा देवे ॥५॥ विधि कर्मों में जहाँ २ जल से कर्म करने का विधान हो वहाँ २ जल क्रिया तीन बार करे ॥६॥ संहिता में जो २ सूक्त अनन्तर कहे गये हैं, जिनके प्रयोजन समान हों उनको एकत्र कर प्रयोग करे ॥७॥ सब ही शान्तकर्मों में शान्तसम्भार, दर्भ, समिद्, आदि । अभिचार कर्मों में रौद्र, आङ्गिरस, सम्भार जानना ॥८॥ सुच्, स्रुव, समिद्, काष्ठ आदि मणि, द्रव्य काष्ठ करना चाहिये । मादानक शृत क्षीरोदन खावे । और मादानक के चमसा में एक रूप रंग के वत्स के गौ के दूध में क्षीरौदन पकावे । मंत्र कर्म में जहाँ द्रव्य का सन्देह हो वहाँ निकृष्ट द्रव्य ग्रहण करे ॥९॥१०॥ “प्रयच्छ पर्शु०” से दर्भ काटने का अस्त्र देवे ॥ ११ ॥ “अरातीयोः” से उलूखल, मुसल, काठ, एवं अन्य कार्य के लिये लकड़ी काटे, चीरे-फाड़े ॥१२॥ “यत्त्वाशिक” से प्रक्षालन करे ॥१३॥ “यद्यत्कृष्णः” से उलूखल मुसल को प्रक्षा- लन करे ॥१४॥ पलाश, उदुम्बर, जम्बु, काम्पील, स्रक्, वंघ, शिरीष, स्रक्त्य, वरण, बिल्व, जङ्गिड़, कुटक, गर्ह, गलावल, वेतस, शिम्बल, सिपुन, स्यन्दन, अरणिकाष्ठ, अश्मयोक्त, तुन्यु, पूतदारु ये शान्त कर्म में प्रयोजनीय हैं ॥१५॥ चिति, प्रायश्चित्ति, शमी, शमका, सवंशा, शाम्य-