भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 285

प्र० ४१ : अ० २५ ] आबकारी विभाग का अध्यक्ष २०१

(१) न चानर्घेण कालिकां वा सुरां दद्यादन्यत्र दुष्टसुरायाः । तामन्यत्र विक्रापयेत् । दासकर्मकरेभ्यो वा वेतनं दद्यात् । वाहनप्रतिपानं सूकरपोषणं वा दद्यात् । (२) पानागाराण्यनेककक्ष्याणि विभक्तशयनासनवन्ति पानोद्देशानि गन्धमाल्योदकवन्ति ऋतुसुखानि कारयेत् । (३) तत्रस्थाः प्रकृत्यौत्पत्तिकौ व्ययौ गूढा विद्युरागन्तूंश्च । (४) क्रेतॄणां मत्तसप्तानामलङ्काराच्छादनहिरण्यानि च विद्युः । तन्नाशे वणिजस्तच्च तावच्च दण्डं दद्युः । (५) वणिजस्तु संवृतेषु कक्ष्याविभागेषु स्वदासीभिः पेशलरूपाभिरागन्तूनां वास्तव्यानां च आर्यरूपाणां मत्तसुप्तानां भावं विद्युः । (६) मेदकप्रसन्नासवारिष्टमैरेयमधूनाम् ।


से बाहर कर किसी दूसरे बहाने से नगराध्यक्ष के हवाले करा देना चाहिए । इसी प्रकार जो व्यक्ति आमदनी से अधिक या बिना आमदनी के ही फजूल खर्च करे उसे भी गिरफ्तार करा देना चाहिए ।

( १ ) थोड़ी कीमत पर, उधार या व्याज सहित अदा होने के मूल्य पर बढ़िया शराब न बेचनी चाहिए, बल्कि ऐसे खरीदारों को घटिया शराब देनी चाहिए । घटिया शराब को बढ़िया शराब की दुकान से न बेचना चाहिए । घटिया शराब या तो दास जैसे छोटे कर्मचारियों को वेतन के रूप में दे देनी चाहिए, अथवा बैल-ऊंट की सवारी हांकने वालों तथा सूअर का पालन-पोषण करने वालों को दे देनी चाहिए ।

( २ ) शराबखानों में अनेक ड्योढ़ियां होनी चाहिए, लेटने तथा बैठने के लिए अलग-अलग कमरे होने चाहिए, शराब पीने के लिए अलग स्थान होने चाहिए, उनमें सुगन्धित द्रव्यों एवं पानी आदि का पूरा प्रबन्ध होना चाहिए, ये सभी स्थान ऐसे बने हों, जो मौसम में सुखद हों ।

( ३ ) सरकारी गुप्तचर को चाहिए कि वह प्रतिदिन शराब की खपत तथा खर्च का हिसाब रखे और यह भी निगरानी रखे कि बाहर से कौन-कौन व्यक्ति वहाँ आते हैं ।

( ४ ) शराब के नशे में बेहोश हो जाने वाले लोगों के जेवर, वस्त्र और नकदी का भी गुप्तचर ध्यान रखे । यदि बेहोश हालत में शराबियों की कोई चीज चोरी हो जाय तो उसको ठेकेदार ही अदा करे, वरन्, वह उतनी ही लागत का जुर्माना राजा को भी अदा करे ।

( ५ ) ठेकेदार को चाहिये कि वह चतुर एवं सुन्दरी दासियों के द्वारा, अलग-अलग कमरों में बेहोश उन बाहर से आये या नगर के रहने वाले, ऊपर से आर्य लगने वाले, शराबियों के भीतरी भावों का पता लगाये ।

( ६ ) शराब कई प्रकार की होती है : १. मेदक, २. प्रसन्ना ३. आसव ४. अरिष्ट ५. मैरेय और ६. मधु ।