कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ४४ : अ० २८ ] नौकाध्यक्ष २१३
(१) यथानिर्दिष्टाश्चैताः पण्यपत्तनयात्राकालेषु प्रेषयेत् । संयान्तीर्नावः क्षेत्रानुगताः शुल्कं याचेत । हिंस्रिका निर्घातयेद्, अमित्रविषयातिगाः पण्य-पत्तनचारित्रोपघातिकाश्च । (२) शासकनियामकदात्ररश्मिग्राहकोत्सेचकाधिष्ठिताश्च महानावो हैमन्तग्रीष्मतार्यासु महानदीषु प्रयोजयेत् । क्षुद्रिकाः क्षुद्रिकासु वर्षा-स्त्राविणीषु । (३) बद्धतीर्थाश्चैताः कार्याः राजद्विष्टकारिणां तरणभयात् । अकाले-ऽतीर्थे च तरतः पूर्वः साहसदण्डः । (४) अकालेऽतीर्थे चानिसृष्टतारिणः पादोनसप्तविंशतिपणस्तरात्ययः । (५) कैवर्तकाष्ठतृणभारपुष्पफलवाटषण्डगोपालकानामनत्ययः सम्भा-व्यदूतानुपातिनां च सेनाभाण्डप्रचारप्रयोगाणां च । स्वतरणैस्तरताम् । बीजभक्तद्रव्योपस्करांश्चानूपग्रामाणां तारयताम् ।
लग जाने के कारण नुकसान हुए माल का टैक्स माफ कर देना चाहिए या नुकसान को देखते हुए आधा ही टैक्स लेना चाहिए ।
( १ ) निःशुल्क या आधे शुल्क वाली नौकाओं को बन्दरगाहों की ओर यात्रा करने के समय में भेज दिया जाय या छोड़ दिया जाय । चलती हुई नौकाएँ जब चुंगी पर पहुँच जायँ तब उनकी चुंगी वसूल की जाय । चोर-डाकुओं की नौकाओं को नष्ट कर दिया जाय । जो नौकाएं शत्रुदेश की ओर जाती हों या जो व्यापार-नियमों का उल्लंघन करती हों, उन्हें भी तहस-नहस कर दिया जाय ।
( २ ) नाव का कप्तान ( शासक ), नावचालक ( नियामक ), लंगड़ डालने वाला ( दात्रग्राहक ), रस्सी या पतवार पकड़ने वाला ( रश्मिग्राहक ), और नौका में भरे हुए पानी को उलीचने वाला ( उत्सेचक ), इन पाँच कर्मचारियों के रहने पर ही बड़ी-बड़ी नौकाओं को गर्मी तथा सर्दी में समान रूप से बहने वाली बड़ी-बड़ी नदियों में चलाने की आज्ञा देनी चाहिए । बरसाती नदियों में चलाने के लिये अलग नौकाएँ होनी चाहिए ।
( ३ ) इन बड़ी नौकाओं को ठहरने के लिये नियत बन्दरगाह होने चाहिए और उन पर पूरी निगरानी रखी जानी चाहिए, जिससे किसी शत्रु राजा के गुप्तचर उनमें प्रवेश न कर सकें ।
( ४ ) कोई भी नाव वाला यदि अनिश्चित समय में ही अनियमित मार्ग से घाट के आर-पार जाये तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए । इसके अतिरिक्त ठीक समय पर और नियत घाट से बिना आज्ञा नाव पार करने वाले व्यक्ति पर पौने सत्ताईस पण दण्ड निर्धारित किया जाय ।
( ५ ) धीवर, लकड़हारे, घसियारे, माली, कुंजड़े, खेतों के रखवाले, चोर की डर से पीछे जाने वाले, राजदूत के पीछे शेष कार्य को पूरा करने के लिए जाने वाली