कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण
(१) ब्राह्मणप्रव्रजितबालवृद्धव्याधितशासनहरगर्भिण्यो नावध्यक्षमुद्राभिस्तरेयुः । (२) कृतप्रवेशाः पारविषयिकाः सार्थप्रमाणाः विशेयुः । (३) परस्य भार्या कन्यां वित्तं वापहरन्तं शङ्कितमाविग्नमुद्भाण्डीकृतं महाभाण्डेन मूर्ध्नि भारेणावच्छादयन्तं सद्योगृहीतलिङ्गिनमलिङ्गिनं वा प्रव्रजितमलक्ष्यव्याधितं भयविकारिणं गूढसारभाण्डशासनशस्त्राग्नियोगं विषहस्तं दीर्घपथिकममुद्रं चोपग्राहयेत् । (४) क्षुद्रपशुर्मनुष्यश्च सभारो माषकं दद्यात् । शिरोभारः कायभारो गवाश्वं च द्वौ । उष्ट्रमहिषं चतुरः । पञ्च लघूयानम् । षड् गोलिङ्गम् । सप्त शकटम् । पण्यभारः पादम् ।
सेना, सैनिक सामग्री और गुप्तपुरुषों को बिना समय एवं बिना आज्ञा ही नदी पार करने पर कोई दण्ड न दिया जाना चाहिए । अपनी नाव से नदी पार करने वाले व्यक्तियों पर भी कोई प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए । बीज, कर्मचारियों की भोजन-सामग्री, फल, फूल, शाक और मसाला ( उपस्कर ) आदि सामान को पार ले जाने वाले व्यक्ति भी दण्ड से मुक्त समझे जाँय ।
( १ ) ब्राह्मण, संन्यासी, बालक, बीमार, राजदूत या हलकारा और गर्भवती स्त्री को नौकाध्यक्ष की मुहर देखकर ही, बिना भाड़ा के पार कर देना चाहिए ।
( २ ) जिन परदेशियों को पासपोर्ट मिल गया हो अथवा पासपोर्ट प्राप्त व्यापारियों के साथ जिन-जिन व्यक्तियों को आने की अनुमति मिल गई हो, वे ही देश में प्रवेश कर सकते हैं ।
( ३ ) किसी की स्त्री, कन्या या किसी का धन चुरा कर भागने वाले व्यक्ति को आगे बताये हुए लक्षणों से पहिचान कर फौरन गिरफ्तार करवा देना चाहिए । वे लक्षण इस प्रकार हैं : यदि वह चौकन्ना-सा नजर आये, ताकत से अधिक बोझा उठाये हो, सिर पर इस प्रकार घास-फूस फैलाये हो कि शक्ल न दिखाई दे, नकली संन्यासी का वेष बनाये हो, संन्यासी वेश बदल कर सादा वेष धारण कर ले, बीमारी का कोई चिह्न न होने पर भी अपने को बीमार जैसा लगाये, डर से मुख की रौनक उतरी हुई हो, बहुमूल्य वस्तुओं को छिपाये हो, गुप्त कागजातों को रखे हो, हथियार छिपाकर रखे हो, जहर आदि को रखे हो, अग्नियोग को छिपाये हो, दूर का सफर करता हो और पासपोर्ट प्राप्त किए बिना ही यात्रा करता हो ।
( ४ ) भेड़, बकरी आदि छोटे जानवरों का और जिस मनुष्य के पास हाथ में उठाने भर का बोझा हो, एक माषक भाड़ा दे । जिस पुरुष के पास सिर अथवा पीठ से उठाने योग्य बोझा हो और गाय, घोड़ा आदि पशुओं का, दो माषक भाड़ा दिया जाय । ऊँट और भैंस का चार माषक भाड़ा दिया जाना चाहिए । इसी प्रकार