भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ५६ : अ० ३ ] विवाह सम्बन्ध ( २ ) २६७

(१) तदेव स्त्रिया भर्तरि प्रसिद्धमदोषाया ईर्ष्याया बाह्यविहारेषु द्वारेषु अत्ययो यथानिर्दिष्टः । इति पारुष्यम् । (२) भर्तारं द्विषती स्त्री सप्तार्तवान्यमण्डयमाना तदानीमेव स्थाप्या- भरणं निधाय भर्तारम् अन्यया सह शयानमनुशयीत । (३) भिक्षुक्यन्वाधिज्ञातिकुलानामन्यतमे वा भर्ता द्विषन् स्त्रियमे कामनुशयीत । (४) दृष्टलिङ्गे मैथुनापहारे सवर्णापसर्पोपगमे वा मिथ्यावादी द्वादश-पणं दद्यात् । (५) अमोक्ष्या भर्तुरकामस्य द्विषती भार्या, भार्यायाश्च भर्ता । परस्परं द्वेषान्मोक्षः । (६) स्त्रीविप्रकाराद् वा पुरुषश्चेन्मोक्षमिच्छेद्, यथागृहीतमस्यै दद्यात् ।


वाली स्त्री को पहिले 'नंगी, अधनंगी, लूली-लँगड़ी, बाप-मरी, मां-मरी' आदि गालियाँ न देकर उसको भले ढंग से नम्रता तथा सभ्यता सिखानी चाहिए । यदि इससे कार्य न सधे तो उसकी पीठ पर बाँस की खपाची, रस्सी या डप्पण से तीन बार चोट करे । फिर भी वह सीधी राह पर न आवे तो उसे वाक्पारुष्य तथा दण्डपारुष्य का आधा दण्ड दिया जाय ।

( १ ) यही दण्ड उस स्त्री को भी दिया जाय जो अकारण ही निर्दोष पति से बुरा व्यवहार करती हो और पति के दरवाजे पर या बाहर किसी प्रकार की इशारे-बाजी या ऐयाशी करे । इस प्रकार के नियम-विरुद्ध आचरण करने वाली स्त्री के लिए इसी प्रकरण में दण्ड का निर्देश किया गया है । यहाँ तक कटु-भाषिणी स्त्री के व्यवहार पर विचार किया गया ।

( २ ) पति-पत्नी का द्वेष : अपने पति के साथ द्वेष रखने वाली स्त्री यदि सात ऋतुकाल तक दूसरे पुरुष के साथ समागम करती रहे तो उसे चाहिए कि वह अपने दोनों प्रकार के स्त्री-धन पति को सौंपकर पति को भी दूसरी स्त्री के साथ समागम करने की अनुमति दे दे ।

( ३ ) यदि पति, स्त्री से द्वेष करता हो तो उसको चाहिए कि वह अपनी स्त्री को संन्यासिनी तथा भाई-बन्धुओं साथ अकेली रहने से न रोके ।

( ४ ) पराई स्त्री के साथ संभोग करने के चिह्न स्पष्ट दिखाई देने पर भी यदि कोई पुरुष इनकार कर दे या किसी प्रेमिका के साथ संभोग करके साफ मुकर जाय तो उसको बारह पण का दण्ड दिया जाय ।

( ५ ) पति से द्वेष-वैमनस्य रखनेवाली स्त्री, पति की इच्छा के विरुद्ध तलाक नहीं दे सकती है । इसी प्रकार पति भी अपनी पत्नी को तलाक नहीं दे सकता है । दोनों में परस्पर समान दोष होने पर ही तलाक संभव है ।

( ६ ) पत्नी में कुछ बुराइयाँ आ जाने के कारण यदि पति उसका परित्याग