भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण ६२
अध्याय ६

दायविभागे अंशविभागः


(१) एकस्त्रीपुत्राणां ज्येष्ठांशः ब्राह्मणानामजाः, क्षत्रियाणामश्वाः, वैश्यानां गावः, शूद्राणामवयः ।

(२) काणलिङ्गास्तेषां मध्यमांशः, भिन्नवर्णाः कनिष्ठांशः ।

(३) चतुष्पदाभावे रत्नवर्जनां दशानां भागं द्रव्याणामेकं ज्येष्ठो हरेत् । प्रतिमुक्तस्वधापाशो हि भवति इत्यौशनसो विभागः ।

(४) पितुः परिवापाद्यानमाभरणं च ज्येष्ठांशः, शयनासनं भुक्तकांस्यं च मध्यमांशः, कृष्णधान्यायसं गृहपरिवापो गोशकटं च कनिष्ठांशः । शेषद्रव्याणामेकद्रव्यस्य वा समो विभागः ।

(५) अदायादा भगिन्यः मातुः परिवापादभुक्तकांस्याभरणभागिन्यः ।


दाय विभाग

पैतृक क्रम से विशेषाधिकार

( १ ) यदि एक स्त्री के कई पुत्र हों तो उनमें से सबसे बड़े पुत्र को वर्ण क्रम से इस प्रकार हिस्सा मिलना चाहिए : ब्राह्मणपुत्र को बकरियाँ, क्षत्रिय पुत्र को घोड़े, वैश्यपुत्र को गायें और शूद्रपुत्र को भेड़ें ।

( २ ) उन पशुओं में जो काणे हों वे मंझले पुत्र को और जो रङ्ग-बिरङ्गे पशु हों वे सबसे छोटे पुत्र को दिए जाँय ।

( ३ ) 'यदि पशु न हों तो, हीरे-जवाहरात को छोड़ कर बाकी सारी सम्पत्ति का दसवाँ हिस्सा बड़े लड़के को अधिक दिया जाय; क्योंकि बड़ा लड़का ही पितरों का पिंडदान एवं श्राद्ध करता है ।' अंश-विभाग के सम्बन्ध में यह उशना (शुक्राचार्य) के अनुयायियों का मत है ।

( ४ ) मृतक पिता की सम्पत्ति में से सवारी और आभूषण बड़े लड़के को, सोने बिछाने और पुराने बर्त्तन मझले लड़के को और काला अन्न, लोहा तथा बैलगाड़ी आदि अन्य घरेलू सामान छोटे लड़के को मिलना चाहिए। बाकी सभी द्रव्यों या एक द्रव्य की बराबर बाँट होनी चाहिए ।

( ५ ) दाय भाग की अनधिकारिणी बहिनें, माता की सम्पत्ति में से पुराने बर्तन तथा जेवरात ले लें ।