कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण
(१) प्रतिषिद्धाः स्यालसहायान्वर्थिधनिकधारणिकवैरिन्यङ्गधृतदण्डाः । पूर्वे चाव्यवहार्याः । राजश्रोत्रियग्रामभृतककुष्ठिव्रणिनः पतितचण्डालकुत्सितकर्माणोऽन्धबधिरमूकाहंवादिनः स्त्रीराजपुरुषाश्च । अन्यत्र स्ववर्गेभ्यः । (२) पारुष्यस्तेयसंग्रहणेषु तु वैरिस्यालसहायवर्ज्याः । रहस्यव्यवहारेष्वेका स्त्री पुरुष उपश्रोता उपद्रष्टा वा साक्षी स्याद्राजतापसवर्जम् । (३) स्वामिनो भृत्यानामृत्विगाचार्याः शिष्याणां मातापितरौ पुत्राणां चानिग्रहेण साक्ष्यं कुर्युः । तेषामितरे वा । परस्पराभियोगे चैषामुत्तमाः परोक्ता दशबन्धं दद्युरवराः पञ्चबन्धम् । इति साक्ष्यधिकारः । (४) ब्राह्मणोदकुम्भाग्निसकाशे साक्षिणः परिगृह्णीयात् । तत्र ब्राह्मणं ब्रूयात्—सत्यं ब्रूहीति । राजन्यं वैश्यं वा—मा तवेष्टापूर्तफलं, कपालहस्तः शत्रुकुलं भिक्षार्थी गच्छेरिति । शूद्रं—जन्ममरणान्तरे यद् वः पुण्यफलं तद्
( १ ) साला, सहायक, क्रीतदास ( अन्वर्थी ), ऋण देने वाला ( धनिक ), कर्जदार ( धारणिक ), दुश्मन, अंगहीन और राज्य से सजा पाये पुरुष गवाह नहीं हो सकते हैं । विश्वासी, चरित्रवान् और दोनों पक्षों से अनुमत व्यक्ति भी यदि व्यवहारकुशल न हों तो वे भी गवाह होने के योग्य नहीं हैं । राजा, वेदपाठी ब्राह्मण, गांव का मुखिया, कोढ़ी, दागयुक्त शरीर वाला, पतित, चाण्डाल, नीच कार्य करने वाला, अंधा, बहरा, गूँगा, घमण्डी, स्त्री और राजकर्मचारी ये सब अपने-अपने वर्गों को छोड़कर अन्यत्र गवाह नहीं हो सकते हैं ।
( २ ) परन्तु पारुष्य, चोरी और व्यभिचार के मामलों में शत्रु, साला और सहायक को छोड़कर पूर्वोक्त बाकी सभी लोग गवाह हो सकते हैं । गुप्त मामलों में स्त्री, राजा और तपस्वी को छोड़कर सुनने-देखने वाला अकेला व्यक्ति भी गवाह हो सकता है ।
( ३ ) नौकरों के मालिक, शिष्यों के आचार्य, पुत्रों के माता-पिता और मालिकों के नौकर आदि परस्पर खुले तौर पर गवाह हो सकते हैं । आपसी मुकदमों में यदि मालिक, आचार्य तथा माता-पिता पराजित हो जायें तो नौकर, शिष्य आदि को वे पराजय का दसवाँ भाग दें; यदि नौकर आदि हार जायें तो अपने स्वामी आदि को वे हारे हुए धन का पाचवाँ हिस्सा दण्ड रूप में दें । यहाँ तक साक्षी के सम्बन्ध में निरूपण किया गया ।
( ४ ) शपथ : पानी से भरे घड़े के पास या आग के पास ब्राह्मण को शपथ के लिए ले जाया जाय, यदि ब्राह्मण गवाह हो तो उसे 'सच बोलो' इतनी भर शपथ दिलाई जाय । यदि गवाही देने वाला क्षत्रिय और वैश्य हो तो उससे 'तुमको यज्ञ आदि इष्ट का और कुआँ, धर्मशाला आदि परोपकार का फल न मिले; तुम अपनी