कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ७३ : अ० १९ ] दण्डपारुष्य ३३७
(१) स्थूलकद्रव्यहिंसायां तच्च द्विगुणश्च दण्डः । (२) वस्त्राभरणहिरण्यसुवर्णभाण्डहिंसायां तच्च पूर्वश्च साहसदण्डः । (३) परकुड्यमभिघातेन क्षोभयतस्त्रिपणो दण्डः । छेदनभेदने षट्-पणः । पातनभञ्जने द्वादशपणः प्रतीकारश्च । (४) दुःखोत्पादनं द्रव्यमन्यवेश्मनि प्रक्षिपतो द्वादशपणो दण्डः । प्राणाबाधिकं पूर्वः साहसदण्डः । (५) क्षुद्रपशूनां काष्ठादिभिर्दुःखोत्पादने पणो द्विपणो वा दण्डः । शोणितोत्पादने द्विगुणः । (६) महापशूनामेतेष्वेव स्थानेषु द्विगुणो दण्डः, समुत्थानव्ययश्च । (७) पुरोपवनवनस्पतीनां पुष्पफलच्छायावतां प्ररोहच्छेदने षट्पणः । क्षुद्रशाखाच्छेदने द्वादशपणः । पीनशाखाच्छेदने चतुर्विंशतिपणः । स्कन्धवधे पूर्वः साहसदण्डः । समुच्छित्तौ मध्यमः । (८) पुष्पफलच्छायावद्गुल्मलतास्वर्धदण्डः । पुण्यस्थानतपोवनश्मशानद्रुमेषु च ।
( १ ) यदि इसी प्रकार झगड़े में बड़ी-बड़ी वस्तुएँ नष्ट हो जायें तो उनकी कीमत मालिक को और मूल्य का दुगुना दंड सरकार को दिया जाय ।
( २ ) यदि कोई वस्त्रों आभूषणों और हिरण्य तथा सुवर्ण के बने बर्तनों को नष्ट करे तो वह मालिक को उनकी पूरी कीमत चुकाये और सरकार की ओर से उसे प्रथम साहस दंड दिया जाय ।
( ३ ) दूसरे की दीवार को धक्का देकर या चोट मारकर हिलाने वाले व्यक्ति को तीन पण दंड दिया जाय; दीवार को तोड़ने-फोड़ने पर छह पण तथा गिराने पर बारह पण दंड और नुकसान का मुआवजा लिया जाय ।
( ४ ) यदि कोई व्यक्ति किसी के घर में कोई घातक वस्तु फेंके तो उसे बारह पण दंड दिया जाय; यदि प्राण-घातक वस्तु फेंके तो प्रथम साहस दंड दिया जाय ।
( ५ ) छोटे-छोटे जानवरों को लकड़ी, बाँस आदि से मारने पर एक या दो पण दंड दिया जाय । यदि मारने पर जानवर के खून निकल जाय तो दुगुना दंड किया जाय ।
( ६ ) गाय, भैंस आदि बड़े पशुओं की इसी प्रकार की चोट पहुँचाने पर दुगुना दंड किया जाय और अपराधी से दवा-दारू के लिए भी खर्च लिया जाय ।
( ७ ) नगर के बाग-बगीचों में लगे हुए फल-फूल तथा छायादार पेड़ों के पत्ते आदि तोड़ने पर छह पण; छोटी-छोटी शाखाओं की टहनियाँ तोड़ने पर बारह पण; मोटी-मोटी शाखाओं को काटने पर चौबीस पण; तने के ऊपरी स्कंध को काटने पर प्रथम साहस दंड; और पेड़ को जड़ से काटने पर मध्यम साहस दंड दिया जाय ।
( ८ ) फली-फूली छायादार झाड़ियों तथा लताओं को काटने पर ऊपर कहे गए,
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