भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 448, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 448
प्रकरण ८०# सिद्धव्यञ्नैर्माणवप्रकाशनम्
अध्याय ५

(१) सत्रिप्रयोगादूर्ध्वं सिद्धव्यञ्जना माणवा माणवविद्याभिः प्रलोभयेयुः। प्रस्वापनान्तर्धानद्वारापोहमन्त्रेण प्रतिरोधकान्, संवननमन्त्रेण पारतल्पिकान्।

(२) तेषां कृतोत्साहानां महासंघमादाय रात्रावन्यं ग्राममुद्दिश्यान्यं ग्रामं कृतकस्त्रीपुरुषं गत्वा ब्रूयुः—'इहैव विद्याप्रभावो दृश्यताम्। कृच्छ्रः परग्रामो गन्तुम्' इति। ततो द्वारापोहमन्त्रेण द्वाराण्यपोह्य 'प्रविश्यताम्' इति ब्रूयुः। अन्तर्धानमन्त्रेण जाग्रतामारक्षिणां मध्येन माणवानतिक्रामयेयुः। प्रस्वापनमन्त्रेण प्रस्वापयित्वा रक्षिणः शय्याभिर्माणवैः संचारयेयुः। संवननमन्त्रेण भार्याव्यञ्जनाः परेषां माणवैः संमोदयेयुः।

(३) उपलब्धविद्याप्रभावाणां पुरश्चरणाद्यादिशयुरभिज्ञानार्थम्।

सिद्धवेशधारी गुप्तचरों द्वारा दुष्टों का दमन

(१) गुप्तचरों के प्रयोग के बाद सिद्धों के वेश में रहने वाले गूढ़ पुरुष चोरों, व्यभिचारियों के समूहों में रहकर सम्मोहनी विद्याओं के द्वारा प्रजा को कष्ट देने वाले दुष्टों को प्रलोभन दें; छिपाने, संकेत से दरवाजा खोलने आदि के मायिक प्रयोगों से चोरों को और वशीकरण संबन्धी मंत्रों के प्रयोगों से व्यभिचारियों को अपने काबू में करें।

(२) चोरों और व्यभिचारियों के बड़े भारी समूह को उत्साहित कर, पहिले से रात में जिस गाँव को जाने का प्रोग्राम बनाया हो, उससे दूसरे ही गाँव में जहाँ लोगों को पहिले से समझा-बुझा दिया है, चोरों, व्यभिचारियों को ले जाकर सिद्धवेशधारी गुप्त पुरुष उनसे कहें 'आप लोग यहीं पर आज हमारी विद्या का प्रभाव देखें; आज दूसरे गाँव जाना तो संभव न हो सकेगा।' इसके बाद द्वारापोह मंत्र से दरवाजों को खोलकर उन चोरों को भीतर घुस जाने को कहें; अन्तर्धान मन्त्र के द्वारा जागते पहरेदारों के बीच से चोरों को निकाल दें, प्रस्वापन मन्त्र पढ़ने का अभिनय कर पहरेदारों को सुलाकर उनकी चारपाइयों के पास से ही चोरों को ले जांय और अन्त में वशीकरण मन्त्र का दिखावा कर दूसरों की बनावटी स्त्रियों के साथ उनको संभोग सुख दिलावें।

(३) जब उन चोरों-व्यभिचारियों को सिद्ध पुरुषों की मन्त्रविद्या पर पूरा भरोसा हो जाय तब उन्हें मन्त्रों के पुरश्चरण (प्रयोग) के लिए प्रेरित करें।