कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ८० : अ० ५ ] गुप्तविधि से दुष्टों का दमन ३६५
(१) कृतलक्षणद्रव्येषु वा वेश्मसु कर्म कारयेयुः । अनुप्रविष्टान् वैकत्र ग्राहयेयुः ।
(२) कृतलक्षणद्रव्यक्रयविक्रयाधानेषु योगसुरामत्तान् वा ग्राहयेयुः । गृहीतान् पूर्वपदानसहायाननुयुञ्जीत ।
(३) पुराणचोरव्यञ्जना वा चोराननुप्रविष्टास्तथैव कर्म कारयेयुर्ग्राहयेयुश्च ।
(४) गृहीतान् समाहर्ता पौरजानपदानां दर्शयेत्—'चोरग्रहणीं विद्यामधीते राजा; तस्योपदेशादिमे चोरा गृहीताः, भूयश्च ग्रहीष्यामि । वारयितव्यो वा स्वजनः पापाचार' इति ।
(५) यं चात्रापसर्पोपदेशेन शम्याप्रतोदादीनामपहर्तारं जानीयात्तमेषां प्रत्यादिशेद्—एष राज्ञः प्रभाव, इति ।
(६) पुराणचोरगोपालकव्याधश्वगणिनश्च, वनचोराटविकाननुप्रविष्टाः प्रभूतकूटहिरण्यकुप्यभाण्डेषु सार्थव्रजग्रामेष्वेनानभियोजयेयुः । अभियोगे
( १ ) फिर जिन घरों में पहिले ही से चिह्न लगी वस्तुएँ रखी गई हों वहाँ उनको चोरी करने के लिए भेजें । अन्त में किसी एक घर में घुसे हुए उन सबको एक साथ गिरफ्तार करवा लें ।
( २ ) अथवा चिह्नित वस्तुओं को बेचते खरीदते, गिरवी रखते समय या मद्य-पान की बेसुध दशा में उन्हें गिरफ्तार करा लें । तब उनके द्वारा पहिले की चोरियों तथा चोरी करने में सहायता देने वाले लोगों के सम्बन्ध में पता लगाया जाय ।
( ३ ) अथवा पुराने अनुभवी चोरों का वेश बनाकर गुप्तचर उनकी मण्डली में मिल जायें और उनसे चोरी कराकर उन्हें धोखे में गिरफ्तार करा दें ।
( ४ ) समाहर्त्ता को चाहिए कि वह उन गिरफ्तार किए गए चोरों को नगर-वासियों के सामने खड़ा कर उनसे कहे 'राजा, चोरों को पकड़ने की विद्या में बहुत निपुण थे । उसी की आज्ञा से इन चोरों को पकड़ा गया है । जो भी ऐसा कार्य करेंगे उनको मैं इसी तरह गिरफ्तार करूँगा । इसलिए तुम लोग अपने अपने स्वजनों को ताकीद कर दो कि वे ऐसा आचरण कदापि न करें ।'
( ५ ) गुप्तचरों की कारामात से गिरफ्तार किये खुरपी, रस्सी, सैल आदि कृषि योग्य छोटी-छोटी वस्तुओं को चुराने वालों से जनता के सामने कहा जाय 'देखो, राजा का ही यह प्रभाव है कि इतनी छोटी-छोटी वस्तुओं की चोरी भी उससे छिपी नहीं रह सकती है ।'
( ६ ) पुराने चोर, शिकारी, बहेलिये एवं चरवाहे के वेश में गुप्तचर, जंगली चोरों और कोलभीलों के समूह में घुल-मिल जायें, तब उन्हें ऐसे गाँव में डाका