कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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हों; जहाँ अल्पश्रम से ही अधिक उपज की प्राप्ति हो; जहाँ अच्छी-अच्छी खानें, हाथियों के जंगल हों; जहाँ की जलवायु नागरिकों के स्वास्थ्यलाभ के लिए उपयोगी सिद्ध हो; जहाँ तरह-तरह के पशु हों; जहाँ परिश्रमी किसान हों; जहाँ की प्रजा दण्ड तथा कर को सहन करने की क्षमता रखती हो । कौटिल्य ने इसको उत्तम जनपद कहा है ( अर्थशास्त्र, पृ० ७७–८१ ) ।
दण्ड : समाज के सभी वर्ग, अथ च, समस्त प्रजा अपने-अपने धर्मपालन में एकनिष्ठ रहे, इसकी देख-रेख का सारा दायित्व राजा पर निर्भर है । अपने-अपने धर्मों का सम्यक् पालन प्रजाजन तभी कर सकते हैं जब उन्हें अपने अधिकारों को भोगने और अपने कर्तव्यों को निबाहने के लिए पूरी सुविधायें प्राप्त हों । समाज निर्बाधित रूप में अपने-अपने धर्मों ( कर्तव्यों ) के प्रति निष्ठावान् बना रहे, उसको उसके अधिकारों की पूरी सुविधायें सुलभ होती रहें, इसी हेतु न्याय की आवश्यकता हुई ।
कौटिल्य जैसे प्रकाण्ड राजनीतिज्ञ ने, जिसके जीवन का अधिकांश भाग राजनीति के क्षेत्र में क्रियात्मक रूप से बीता, न्याय की दिशा में बहुत ही बारीकी से विचार किया है । न्याय-व्यवस्था को उसने दो भागों में बाँटा है : ( १ ) व्यवहार और ( २ ) कण्टकशोधन ।
नागरिकों के पारस्परिक कलहों के मूल कारणों का पता लगाकर उनकी विवेचना करना और तब निरपेक्ष होकर दोषी को दण्ड तथा निर्दोषी को मुक्ति देना, कौटिल्य की न्याय-स्थापना का यह पहिला व्यवहार पक्ष है । न्याय-व्यवस्था के दूसरे पक्ष का संबंध राज-कर्मचारियों से है; किन्तु उसके अन्तर्गत पूंजीपति और दुर्जन लोगों का भी समावेश किया गया है । अर्थात् राजकर्मचारियों, व्यवसायियों और दुर्जनों से प्रजा की किस प्रकार रक्षा की जाय, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कण्टकशोधन नामक न्याय के दूसरे पक्ष की स्थापना की गयी है ।
न्याय-व्यवस्था के लिए कौटिल्य ने जिस व्यवहार शब्द का प्रयोग किया है वह बहुत ही उपयुक्त बैठता है । आचार्य कात्यायन ने व्यवहार शब्द की निष्पत्ति करते हुए लिखा है वि=नानार्थ; अव=संदेह; और हार=हरण । इस नानार्थ संदेह के हरण याने दूर करने के उपायों का दिग्दर्शन ही व्यवहार के अंतर्गत किया है । कौटिल्य के अर्थशास्त्र ( पृ० २५५–२६० ) में अपने प्रकार के व्यवहार-मार्गों पर बड़ी सूक्ष्मता से विचार किया गया है ।