कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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"मार्क्स ने जिस दूसरी महत्त्वपूर्ण बात का पता लगाया है, वह पूंजी और श्रम के सम्बन्ध की निश्चित व्याख्या है। दूसरे शब्दों में उसने यह दिखा दिया कि वर्तमान समाज में उत्पादन की जो पूंजीवादी पद्धति चालू है, उसके द्वारा किस तरह पूंजीपति, मजदूर का शोषण करता है। जब एक बार अर्थशास्त्र ने यह सिद्धांत बना लिया कि सभी तरह की संपत्ति और मूल्य का मूलस्रोत श्रम ही है तो, यह प्रश्न भी अनिवार्य रूप से सामने आता है कि इस सिद्धान्त से हम इस तथ्य का मेल कैसे करें कि मजदूर अपने श्रम से जिस मूल्य का निर्माण करता है वह सब उसे नहीं मिलता, वरन् उसका एक अंश उसे पूंजीपति को दे देना पड़ता है" (फ्रेडरिक एंगेल्स : कार्ल मार्क्स और उनके सिद्धांत पृ० ८-१०, डा० रामविलास शर्मा का अनुवाद)।
समाजवादी दृष्टिकोण से इतिहास की इन नयी धारणाओं का परिणाम महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुआ। इनसे पता लगा कि पहिले इतिहास की गति वर्ग-विरोध और वर्ग-संघर्षों के बीच रही है; शासक और शासित, शोषक और शोषित का अस्तित्व बराबर बना रहा है। मार्क्स से पूर्व की समूची ऐतिहासिक प्रगति विशेषाधिकार प्राप्त एक अल्पसंख्यक समुदाय पर निर्भर थी। मार्क्स के विवेचन के बाद समाज की वे उत्पादक शक्तियाँ, जो पूँजीवादी नियंत्रण की सीमाओं को लांघ चुकी हैं, अब उस संघटित सर्वहारा वर्ग की ताक में हैं जिससे उस पर अधिकार कर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि जन-साधारण का उत्पादन में ही भाग न हो, बल्कि, सामाजिक संपत्ति के वितरण और उसके संचालन में भी उसका हाथ रहे, जिससे कि उत्पादक शक्तियों और उत्पादन, दोनों में उत्तरोत्तर वृद्धि हो।
मार्क्स के बाद एंगेल्स, लेनिन और स्टालिन आदि अर्थशास्त्रियों एवं क्रांतिकारी राजनीतिज्ञों ने भी आज के वैज्ञानिक समाजवाद का मूल आधार यही माना है।
मानव-इतिहास में विकास के नियम की पहिली खोज मार्क्स ने की थी। उसने एक अभूतपूर्व सत्य का उद्घाटन किया कि किसी भी युग में जीविका के तात्कालिक भौतिक साधनों का उत्पादन ही समाज के आर्थिक विकास का मूल कारण रहा है। उसने बताया कि कला, धर्म, विज्ञान, राजनीति, साहित्य आदि के लिए समय देने से पूर्व यह आवश्यक है कि मनुष्य जाति के लिए रोटी, रोजी, वस्त्र और रहने के साधन सुलभ हों।
मार्क्स के विचारों में सच्चाई, आत्मबल, विश्वास और विश्लेषण की जो