भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 67

( ६३ )

आवागमन के अबाधक्रम को छोड़कर निरंतर नीचे से ऊपर की ओर अविराम गति से अग्रसर होना ही चिरंतन है। चितंनशील मस्तिष्क में द्वंद्वात्मक दर्शन इसी को उत्क्रांत करता है ( वही, पृ० २१; तथा ऐंगेल्स : डूरिंग का मत-खंडन, पृ० ३१ )।

वर्ग-संघर्ष : इतिहास से हमें विदित होता है कि जातियों और समाजों के संघर्ष से ही क्रांति का बीजारोपण हुआ है। आज का समाज दो प्रमुख हिस्सों में बँटा है : पूंजीवादी और श्रमजीवी। पूंजीवादी वर्ग के विरुद्ध जितने भी वर्ग खड़े हैं उनमें मजदूर वर्ग ही एक ऐसा है, जिसने वास्तविक क्रांति को जन्म दिया है। निम्न मध्य-वर्ग में छोटे कारखानेदार, दूकानदार, दस्तकार आदि जितने भी हैं उन्होंने भी अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये पूंजी-पति-वर्ग से ही संघर्ष किया है; किन्तु उनके संघर्ष में क्रांति के तत्त्व न होकर रूढिवादिता अधिक है। बल्कि मार्क्स ने उनको प्रतिक्रियावादी कहा है, क्योंकि वे इतिहास के पहियों को पीछे की ओर घुमाने की कोशिश करते हैं ( देखिए कम्युनिस्ट घोषणा पत्र )। संयोगवश उनके संघर्ष में यदि क्रांति का आभास भी मिलता है तब भी वे अपने वर्तमान हितों की अपेक्षा अपने भविष्य के स्वार्थों की ही रक्षा करते हैं।

आधुनिक समाजवाद की यही रूपरेखा है और मार्क्स तथा ऐंगेल्स प्रभृति अर्थशास्त्रियों ने मानवता के सुख-चैन और कल्याण के लिए इसी को एक मात्र साधन स्वीकार किया है।

आचार्य कौटिल्य और उनका अर्थशास्त्र

आचार्य कौटिल्य का महाव्यक्तित्व एक पारंगत राजनीतिज्ञ के रूप में मौर्य साम्राज्य के विपुल यश के साथ एकप्राण होकर, एक ओर तो भारत के राजनीतिक इतिहास में अपनी कीर्ति-कथा को अमर बनाये है और दूसरी ओर अपनी अतुलनीय, अद्भुत कृति के कारण संस्कृत साहित्य के इतिहास में अपने विषय का एकमात्र विद्वान् होने का गौरव उन्हें प्राप्त है। इन असाधारण खूबियों के कारण ही आचार्य कौटिल्य के नाम-माहात्म्य की कथाएँ पुराणों से लेकर काव्य, नाटक और कोष-ग्रन्थों में सर्वत्र परिव्याप्त हैं। कौटिल्य द्वारा नंद-वंश का विनाश और मौर्य-वंश की प्रतिष्ठा से सम्बन्धित विष्णुपुराण में एक कथा आती है :

'महाभदन्त तथा उसके नौ पुत्र १०० वर्ष तक राज्य करेंगे। अन्त में कौटिल्य नामक एक ब्राह्मण उस राज्य-परम्परा के अंतिम उत्तराधिकारी नंदवंश

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला) · पृष्ठ 67, कुल 918 में से · BharatKosha