भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० १३५-१३६ : अ० १ ] शक्त्यादिज्ञान और यात्राकाल ५९१

विषम इति विशेषाः । तेषु यथास्वबलवृद्धिकरं कर्म प्रयुञ्जीत । यत्रात्मनः सैन्यव्यायामानां भूमिरभूमिः परस्य, स उत्तमो देशः । विपरीतोऽधमः । साधारणो मध्यमः । (१) कालः शीतोष्णवर्षात्मा । तस्य रात्रिरहः पक्षो मास ऋतुरयनं संवत्सरो युगमिति विशेषाः । तेषु यथास्वबलवृद्धिकरं कर्म प्रयुञ्जीत । यत्रात्मनः सैन्यव्यायामानामृतुरनृतुः परस्य स उत्तमः कालः । विपरीतोऽधमः । साधारणो मध्यमः । (२) शक्तिदेशकालानां तु शक्तिः श्रेयसीत्याचार्याः । शक्तिमान् हि निम्नस्थलवतो देशस्य शीतोष्णवर्षवतश्च कालस्य शक्तः प्रतीकारे भवति । (३) देशः श्रेयानित्येके, स्थलगती हि श्वा नक्रं विकर्षति, निम्नगतो नक्रः श्वानमिति । (४) कालः श्रेयानित्येके । दिवा काकः कौशिकं हन्ति, रात्रौ कौशिकः काकम् इति ।


जल, स्थल, समतल और ऊबड़-खाबड़ आदि विशेष भाग होते हैं। इन भू-भागों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाय जिससे अपनी बल-वृद्धि में निरन्तर विकास होता रहे। जिस प्रदेश में अपनी सेना की कवायद के लिए सुविधा तथा शत्रुसेना की कवायद के लिए असुविधा हो वह उत्तम देश, जो इसके सर्वथा विपरीत हो वह अधम देश और जो अपने तथा शत्रु के लिए एक समान सुविधा-असुविधा वाला हो वह मध्यम देश कहलाता है ।

( १ ) काल : काल के तीन विभाग हैं : सर्दी, गर्मी और वर्षा । काल का यह प्रत्येक भाग रात, दिन, पक्ष, मास, ऋतु, अयन, संवत्सर तथा युग आदि विशेषताओं में विभक्त है । समय के इन विशेष भागों में अपनी शक्ति को बढ़ाने योग्य कार्य करने चाहिए । जो ऋतु अपनी सेना के व्यायाम के लिए अनुकूल हो वह उत्तम ऋतु जो इसके विपरीत हो वह अधम ऋतु, और जो सामान्य हो वह मध्यम ऋतु कहलाती है ।

( २ ) प्राचीन आचार्यों का मत है कि ‘शक्ति, देश और काल, इन तीनों में शक्ति ही सर्वोच्च है, क्योंकि शक्तिसम्पन्न राजा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश और वर्षा, गर्मी आदि प्रतिकूल समय में विपरीत परिस्थितियों का प्रतीकार करने में समर्थ होता है ।’

( ३ ) कुछ पूर्वाचार्यों का यह कहना है कि ‘इन तीनों में देश ही श्रेष्ठ है, क्योंकि जमीन पर तो कुत्ता घड़ियाल को खींच लेता है और पानी में वही घड़ियाल कुत्ते को खींच लेता है ।’

( ४ ) इसके विपरीत कुछ आचार्य समय को ही श्रेष्ठ बताते हैं । उनका कहना