भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रस्तुत संस्करण

'कौटिलीय अर्थशास्त्र' के साथ डॉ० शाम शास्त्री और महामहोपाध्याय गणपति शास्त्री का नाम अमर है। डॉ० शाम शास्त्री का अंग्रेजी अनुवाद और म० म० गणपति शास्त्री का संस्कृतानुवाद इस विषय की सर्वांगीण, शोधपूर्ण और प्रामाणिक कृतियां हैं।

'कौटिलीय अर्थशास्त्र' का प्रस्तुत संस्करण म० म० गणपति शास्त्री के संस्करण पर आधारित है। स्व० शास्त्री जी ने 'अर्थशास्त्र' का गम्भीर अध्ययन करने के उपरान्त उसके मूल भाग को विषय और प्रसङ्ग के अनुसार अलग-अलग वर्गों, वाक्यों और वाक्यखण्डों में विभाजित किया है। उनकी यह स्वतन्त्र देन है।

प्रत्येक सूत्र के आगे संख्या डालने की अवैज्ञानिक पद्धति स्व० शास्त्री जी के संस्करण में नहीं अपनायी गयी है। बल्कि उन्होंने मूल पाठ के प्रत्येक पैराग्राफ को इस ढङ्ग से संयोजित किया है कि अर्थसङ्गति की दृष्टि से वह भग्नतया विच्छिन्न न होने पावे। डॉ० शाम शास्त्री का दृष्टिकोण भी यही रहा है।

प्रस्तुत हिन्दी अनुवाद के प्रत्येक पैराग्राफ पर संख्या का उल्लेख इसलिये किया है कि नीचे उसका अनुवाद पढ़ने में सुगमता हो। अधिकरण, प्रकरण और अध्याय का जो क्रम सभी संस्करणों में है वही इस संस्करण में भी देखने को मिलेगा।

पुस्तक के अन्त में चाणक्य-सूत्रों को भी जोड़ दिया गया है। आचार्य कौटिल्य के नाम पर चाणक्य सूत्रों को जोड़ना ऐतिहासिक दृष्टि से यद्यपि असङ्गत है, किन्तु अध्येताओं की सुविधा के लिये उनका समावेश करना भी आवश्यक समझा गया है।

डॉ० शाम शास्त्री और म० म० गणपति शास्त्री के संस्करणों के अतिरिक्त उदयवीर शास्त्री के हिन्दी अनुवाद से भी मैंने सहायता ली है। इस हेतु इन सभी महानुभावों का मैं विशेष रूप से आभारी हूँ। श्रद्धेय श्री रामचंद्र झा के सत्परामर्शों के लिये मैं अनुगृहीत हूँ।

—वाचस्पति गैरोला