कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
पृष्ठ 781, कुल 918 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्र० १६८-१७० : अ० ५] योग-दण्डादि द्वारा विजय ६९७
मोक्षणेन प्रवेशयेत् । प्रत्यासन्ने वामित्रे जनपदाज्जनमवरोधक्षममतिनयेत् । दुर्गाच्चानवरोधक्षममपनयेत् । प्रत्यादेयममिविषयं वा प्रेषयेत् । जनपदं चैकस्थं शैलवननदीदुर्गेष्वटवीव्यवहितेषु वा पुत्रभ्रातृपरिगृहीतं स्थापयेत् । (१) उपरोधहेतवो दण्डोपनतवृत्ते व्याख्याताः । (२) तृणकाष्ठम् आ योजनाद् दाहयेत् । उदकानि च दूषयेद्; अवास्त्रावयेच्च । कूटकूपावपातकण्टकिनीश्च बहिरुब्जयेत् । (३) सुरुङ्गाममित्रस्थाने बहुमुखीं कृत्वा विचयमुख्यानभिहारयेद्, अमित्रं वा । परप्रयुक्तायां वा सुरुङ्गायां परिखामुदकान्तिकीं खानयेत्, कूपशालामनुसालं वा । अतोयकुम्भान् कांस्यभाण्डानि वा शङ्कास्थानेषु स्थापयेत् खाताभिज्ञानार्थम् । ज्ञाते सुरुङ्गापथे प्रतिसुरुङ्गां कारयेत् । मध्ये भित्त्वा धूममुदकं वा प्रयच्छेत् ।
पकड़ कर जेल में बन्द कर दिया जाय; और बाधा पहुँचाने में असमर्थ शत्रु की जेल में बन्द हुए व्यक्तियों को छुड़ा दिया जाय । शत्रुदेश के ऐसे व्यक्ति को, जिसे अवश्यमेव लौटाना पड़े, स्वयं ही शत्रु देश को भेज दिया जाय । जिन जनपदों पर शत्रु राजा का एकच्छत्र राज्य हो वहाँ के पर्वतदुर्गों, नदीदुर्गों और वनदुर्गों को तथा घने जंगलों से घिरे दूसरे प्रदेशों को शत्रु राजा के पुत्र या बन्धुओं के अधिकार में करा देना चाहिए ।
( १ ) उपरोध ( घेरा डालना ) के उपायों का निरूपण दण्डोपनत नामक प्रकरण में यथास्थान किया जा चुका है ।
( २ ) शत्रु के सैनिक पड़ाव के चारों ओर चार कोस तक की सब घास, लकड़ी आदि जला देनी चाहिए और पानी को विष मिला कर दूषित कर देना चाहिए । उस स्थान के आस-पास के जितने तालाब या बाँध हैं उनको तोड़कर सब पानी बाहर बहा देना चाहिए और शत्रु सेना के मार्ग में अँधेरे कुंए, घास-फूस से ढके गड्ढे तथा जगह-जगह काँटेदार लोहे के जाल बिछा देने चाहिए ।
( ३ ) शत्रु के सैन्य शिविर में एक बहुमुखी सुरंग बनाकर शत्रु के प्रधान व्यक्तियों को उसमें फँसा देना चाहिए; अथवा अवसर आने पर शत्रु राजा को भी उसी में फँसा देना चाहिए । यदि विजिगीषु के दुर्ग में आने के लिए शत्रु सुरंग बनाये तो दुर्ग के चारों ओर इतनी गहरी खाई खुदवानी चाहिए कि नीचे का पानी निकल आवे । यदि ऐसा करने में अधिक असुविधा हो तो परकोटे के चारों ओर गहरे-गहरे कुएँ खुदवाये जायें । अथवा जिन स्थानों में सुरंग बनाये जाने की आशंका हो वहाँ खाली घड़ों को या काँसे के छोटे-छोटे खंभों या काँसे के टुकड़ों को रख दिया जाय; जिससे कि सुरंग खोदने का पता लग जाय । शत्रु की सुरंग का पता लग जाने पर दूसरी