भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० १७२ : अ० २ ] योगवामन ७११

(१) जनपदान्तेवासी सिद्धव्यञ्जनो वा राजानं शत्रुदर्शनाय योजयेत् । प्रतिपन्नं बिम्बं कृत्वा शत्रुमावाहयित्वा निरुद्धे देशे घातयेत् । (२) अश्वपण्योपयाता वैदेहकव्यञ्जनाः पण्योपायननिमित्तमाहूय राजानं पण्यपरीक्षायामासक्तमश्वव्यतिकीर्णं वा हन्युः, अश्वैश्च प्रहरेयुः । (३) नगराभ्याशे वा चैत्यमारुह्य रात्रौ तीक्ष्णाः कुम्भेषु नालीन् वा विदलानि धमन्तः-‘स्वामिनो मुख्यानां वा मांसानि भक्षयिष्यामः, पूजा नो वर्तताम्’ इत्यव्यक्तं ब्रूयुः । तदेषां नैमित्तिकमौहूर्तिकव्यञ्जनाः ख्यापयेयुः । (४) मङ्गल्ये वा ह्रदे तटाकमध्ये वा रात्रौ तेजनतैलाभ्यक्ता नागरूपिणः शक्तिमुसलान्ययोमयानि निष्पेषयन्तस्तथैव ब्रूयुः । ऋक्षचर्मकञ्चुकिनो वा अग्निधूमोत्सर्गयुक्ता रक्षोरूपं वहन्तस्त्रिरपसव्यं नगरं कुर्वाणाः श्वशृगाल-


द्वारा अपने आप को जल के भीतर छिपा कर अपने स्वरूप को स्वच्छ, श्वेत एवं दिव्य, देवता के रूप की तरह बना लें । फिर सत्री गुप्तचर उसको वरुण देवता या नागराज कहकर उसका प्रचार करे । जब राजा उस पर विश्वास कर अपनी मनो-कामना पूर्ण करने की याचना करे तो उसे पूर्ववत् मार डाला जाय ।

( १ ) अथवा जनपद की सीमा में रहने वाला सिद्धवेष गुप्तचर वहाँ के राजा को शत्रु राजा से मिला देने का प्रपंच रचे । जब राजा इस पर राजी हो जाय तो पूर्व निर्धारित सांकेतिक चिह्नों के द्वारा शत्रु राजा को वहाँ बुलाकर फिर उस फँसाये गये राजा को एकांत में मार दिया जाय ।

( २ ) घोड़ों के व्यापारी गुप्तचर अच्छे-अच्छे घोड़ों को लेकर शत्रु राज्य में जायें और सौदे के बहाने शत्रु को अपने पास बुलायें । जब राजा घोड़ों की परीक्षा कर ले या घोड़ों से घिर जाय तब उसको मार दिया जाय और उन्हीं घोड़ों पर सवार होकर उसकी राजधानी पर हमला बोल दिया जाय ।

( ३ ) अथवा नगर के समीपस्थ किसी समाधि या श्मशान में खड़े वृक्ष पर चढ़ कर सत्री गुप्तचर रात में अव्यक्त रूप से इस प्रकार बोलें 'हम इस राजा के या इसकी मुख्य प्रकृतियों के मांस को अवश्य खायेंगे, हमारी पूजा होनी चाहिए ।' इस इस बात को शकुनवक्ता ( नैमित्तिक ) तथा ज्योतिषी ( मौहूर्तिक ) के वेष में रहने वाले गुप्तचर सर्वत्र प्रकाशित कर दें ।

( ४ ) अथवा किसी मांगलिक गहरे जलाशय में रात के समय वे गुप्तचर नाग का रूप बनाकर तथा शरीर में जलने वाले तेल की मालिश कर हाथ में लोहे की बनी हुई शक्ति और मूसल लेकर उन्हें परस्पर रगड़ते हुए चिल्लायें कि हम राजा और उसके मंत्रियों का मांस खायेंगे; हमारी पूजा होनी चाहिए' । अथवा रीछ की खाल को ओढ़ कर राक्षसों का वेष बनाये मुँह से आग-धुआं उगलते हुए, नगर के

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