भारतकोश
कवितावली (सटीक - गीताप्रेस)

कवितावली (सटीक - गीताप्रेस)

Kavitavali with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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२५ लंकाकाण्ड कौनकी हाँकपर चौंक चंडीसु, विधि, चंडकर थकित फिरि तुरग हाँके। कौनके तेज बलसीम भट भीम-से भीमता निरखि कर नयन ढाँके॥ दास-तुलसीसके विरुद बरनत विबुध, बीर विरुदैत बर बैरि धाँके। नाक नरलोक पाताल कोउ कहत किन, कहाँ हनुमानु-से बीर बाँके॥४५॥ किसकी हाँकपर ब्रह्मा और शिवजी चौंक उठते हैं और सूर्य थकित होकर फिर (अपने रथके) घोड़ोंको हाँकते हैं? किसके तेजकी भयङ्करताको देखकर भीमसेन-जैसे बलसीम वीर भी हाथोंसे नेत्र मूँद लेते हैं? बुद्धिमान् लोग तुलसीदासके स्वामी (हनुमान् जी) के यशका गान करते हुए कहते हैं कि उन्होंने अच्छे-अच्छे कीर्तिशाली वीर शत्रुओंपर धाक जमा ली। कोई बतलावे तो सही कि हनुमान् जी के समान बाँका वीर आकाश, मनुष्यलोक और पातालमें कहाँ है? जातुधानावली-मत्तकुंजरघटा निरखि मृगराजु ज्यों गिरितें टूट्यो। बिकट चटकन चोट, चरन गहि, पटकि महि, निघटि गए सुभट, सतु सबको छूट्यो॥ 'दासु तुलसी' परत धरनि धरकत, झुकत हाट-सी उठति जंबुकनि लूट्यो।