काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary
महाकवि दण्डी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६० काव्यादर्श [३।७४ (क) याऽमताश कृतायासा, सा याता कृशता मया । ────────→ ←──────── रमणारकता तेऽस्तु स्तुतेता करणामर ॥ ७४ ॥ ────────→ ←──────── (क) हे अमत (अनिष्ट, अनुचित) आशा वाले, जो कृशता आयास (क्लेश) करने वाली (होती है), वह मैंने पा ली है । हे करणों (इन्द्रियों) के लिये (मृत-समान) रमण (आनन्ददायी कान्त), तुम्हारी स्तुत (प्रशंसा) से इत (युक्त) आरकता (आगन्तृत्व) होवे ॥ ७४ ॥ ‘सर्वतोभद्र’ नामसे चित्रबन्धोंमें परिगणित किया है, यमकमें नहीं । यही कारण है कि प्रतिलोम यमकमें उन्होंने पूरे पादसे कमकी आवृत्ति नहीं मानी है । वर्णोंके पूर्वानुभवसंस्कारबोधिनी अदूरता दण्डीके अनुसार अनुप्रास में अपेक्षित होती है, यमकमें नहीं । अन्यथा अत्यधिक व्यवधान वाले प्रथमादिचतुर्थ- पादान्तयमक कैसे निष्पन्न होंगे ? इसे यदि अपेक्षित माना भी जाये, तो प्रतिलोमयमकमें भी अनुलोम पठित वर्णोंका पूर्वानुभवसंस्कार उनके प्रति- लोमपाठमें विचित्र अवश्य लगता है, पर तिरोहित नहीं हो जाता । अतः किसी प्रकारका चित्रनिबन्धन न होनेके कारण पाद, अर्ध और श्लोककी प्रतिलोम आवृत्तिको ‘चित्र’ में शामिल करना उचित नहीं है । इसका उचित स्थान यमक ही है, जो इसे दण्डीने दिया है । बादके आचार्योंने इस विषयमें कोई नई बात नहीं कही है ॥ ७३ ॥ (७. क) पादप्रतिलोम यमक—‘यामताश कृतायासा०’ (७४) श्लोकमें विषम पादोंमें जिस क्रमसे वर्णविन्यास किया गया है, सम पादोंको प्रतिलोम क्रमसे यदि पढ़ा जाता है, अर्थात् सम पादके अन्तिम अक्षरको आदिम और इस प्रकार उलटे पढ़ते-पढ़ते आदिम अक्षरको अन्तमें पढ़ा जाता है, तो विषम पादका वर्णविन्यास उपलब्ध हो जाता है । अनुलोम और प्रतिलोम, परस्पर सम्बद्ध हैं । इसलिये इस भेदको ‘अनुलोम-प्रतिलोम’ भी कहते हैं । अनुलोमसे प्रतिलोमकी प्राप्ति अनिवार्य नहीं है । जबकि प्रतिलोमसे अनुलोमकी प्राप्ति अवश्यम्भावी है । इसलिये इस भेदमें प्रतिलोमता ही महत्त्वपूर्ण है । यही कारण है कि दण्डीने इस भेदके असाधारण धर्म प्रतिलोम आवृत्तिके आधार पर ही लक्षण और सञ्ज्ञाका विधान किया है । भोजने ‘गत-प्रत्यागत’ सञ्ज्ञाका प्रयोग किया है । कविने प्रकृत दुष्कर यमकमें कोमल विप्रलम्भ रति निबद्ध की है । ‘अमताश’, ‘आरकता’, ‘स्तुतेता’, ‘करणामर’ पदोंकी सुपारियोंको तोड़कर