भारतकोश
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काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary

महाकवि दण्डी द्वारा

DevanagariHindipublished270 पृष्ठ

२४८ काव्यादर्श श्लोकाङ्क श्लोकप्रतीक पृष्ठ श्लोकाङ्क श्लोकप्रतीक पृष्ठ ८२, ८७ सामायामामाया १०१, ११० १४५ स्थितिर्निर्माणसंहार १७२ ४५ सारयन्तमुरसा रमयन्ती ५४ ३६ स्थिरायते यतेन्द्रियः ४८ ३३ सालं सालम्बकलिका ४३ ६२ स्मरानलो मानविवर्धितो ७४ ३२ सुराजितह्रियो यूनां ४२ २३ स्वयमेव गलन्मान ३३ ११३ सुराः सुरालये स्वैरं १४० १३७ हन्यते सा वरारोहा १६५ ६४ सूरिः सुरासुरासारि ११८ ११७ हृतद्रव्यं नरं त्यक्त्वा १४५ १५३ स्त्रीणां संगीतविधि १८३ ─o─ प्रसादिनी-मङ्गल-श्लोक-सूची श्लोकप्रतीक पृष्ठ श्लोकप्रतीक पृष्ठ अनलम्भाविभिस्त्वोध्यां ६५ कृत्वा नखमणीन्स्वान्तः १ अनुजे पक्षपातस्य १५२ कृष्णेऽप्यकृष्णे मेघेन ६४ अब्भ्रं रचाय्यसंस्पृष्टं १५२ खरकग्रामभूः पुण्या २३३ अर्थाभापोऽमला यस्य १६ गणनायक विघ्नविघातक (५) अर्धनारीस्तनं पातुं १५२ गतेऽब्दे वयसः प्रीत्या (१२) अलं प्रार्थनया वाऽस्तु (१२) गेहिनी सर्वसौख्यानां (३) अस्ति तस्यात्मजः शास्त्री २३३ चन्द्रिकागौरवर्ण्यं १६ अहो एतस्य वैमल्यं २३३ चित्रं विचित्रसम्भारं १ आद्याध्याययोर्व्याख्या २३३ ज्येष्ठे कृष्णे चतुर्थ्यां च (१२) आद्या निरुक्तमीमांसा २३४ ज्योतिर्विद्भूषणं शैवः २३३ आषाढशुक्लषष्ठ्यां हि १६ त एव काव्याश्च गुणा (४) इतोऽधिका देवगिरोऽभि (४) तत्त्वं त्वस्य कविर्वेत्ति ६२ ईर्ष्यादिदोषपोषण ६५ तत्त्वं वेत्ति स्वयं दण्डी १०५ कपूयाचरणे राज्ञि १२० तमःप्रधानचैतन्या १ कर्के भानावत्रौ चन्द्रे ६५ तुलसीराम-रामज्यौ २३३ किरोड़ीमलमहाविद्या २३३ त्रयोदश्यां गुरौ प्रातश् १२०

प्रसादिनी-मङ्गल-श्लोक-सूची २३६ श्लोकप्रतीक पृष्ठ श्लोकप्रतीक पृष्ठ त्रयोविंशतिरस्याश्च २३४ रीतित्रयप्रभेदेन २३३ त्रिभिर्गुणैर्गुणावा यज् २३४ लोकान्दिव्यान्सुखान्भोक्तुं २३३ दूराद् गन्धमुपाघ्राय (१२) वाग्देव्याः प्रीतये सेयं ६५ दोषाकरस्तु चन्द्रोऽयं १५२ विदुषी हस्तरेखाणां (३) द्वाविंशदिवसेऽगस्त्ये २३२ विद्वत्पादरजोमृष्टा २३४ ध्यात्वा पाद-युगे गौर्या (१२) विभाति चित्ते च नखच्छटा (४) नभःकृष्णे भृगो रात्रौ १२० विश्वविद्यालयेनेयं २३४ नभोऽङ्काङ्कभूवर्षे (१२) विष्णुदत्तस्य शास्त्रेषु २३३ निगमबोधतीर्थस्य २३३ विसञ्ज्ञ उद्भटः सोऽयं २३३ निर्दोषाश्रावसंयुक्ता १२० वृषं जिगमिषावर्के (१२) नेयत्ता कविभावानां ६२ व्याख्ये वैदिकवाङ्मये २३४ नैवेष्टा भामहैर्मुग्धैर् १२० शरीरमात्रं खलु धर्म (४) पकारस्य व्ययादेस्तु १५२ शान्त्वेषा ग्रथिता स्रग् वै (१२) पाटलौष्ठदलच्छन्न १२१ शास्त्रचर्चामिषेणेयं २३४ पाठकके करकमलोंमें (५) शिवकरणशर्माख्य २३३ पुण्यानि मे सन्ति च (४) शिवनारायणः शास्त्री (१२) प्रियायाः कुसुमाख्यायाः २३२ शुचौ शुचौ रवौ पुष्ये १ प्रीयतां चैव नित्या सा २३४ शुभं भवतु पुस्तस्या (२४३) प्रीयतामनया स्तुत्या २२६ श्रद्धयेतोऽपि भूयस्या २३४ बालप्रबोधिनी टीको २३४ षष्ठेऽहन्यस्मिन्नगस्त्यस्य १५२ भक्त्या दण्डिनि गीर्देव्याः २३४ सञ्चितानि स्वपुण्यानि (३) भगवती च विद्या च २३३ सत्त्वहिते तु चैतन्ये १ भाद्रकृष्णत्रयोदश्यां २२६, २३२ सद्योऽधिगन्तुं च समाश्रये (४) भामहो न विधुस्तुल्यः २३३ सम्प्रत्याख्यामि ताः सम्यक् १२० भूयस्यै भूतये भूयाद् ६४ सरस्वती श्रीश्च शरीर (४) मम्मटान्तं व्यधायैतत् २२६ सिद्धान्तकौमुदीभ्वादि २३४ मयि स्निग्धाऽस्य भार्या च २३३ सुकरं दुष्करं वृत्तं १६ माधुर्यं जीवने यस्या (३) हन्तेदमुज्ज्वलं दीप्तं १२१ यमकोदाहृतिग्रामो ६४ हरो हरतु सन्ताप १२० यमक्रोदाहृतिम्पाख्यां १६ —o—

सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूची ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क | ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क अग्निपुराण १३, १४ | का इतिहासदर्शन ३५ अच्युतोत्तर ६, १२१, १३२ | आदिपर्व १४८, २२१ अथर्ववेद १२२, १२४ | आपस्तम्ब श्रौतसूत्र २१५ अभिज्ञानशकुन्तल (शाकुन्तल) १६२, | आश्चर्यचूड़ामणि १८३ १७१ | ईशोपनिषद्भाष्यकुसुमाञ्जली ६२ अभिनवभारती (अभिनवगुप्त) | उणादिसूत्र १२१ ३, ७२, १५४, १६०, १६२, १८०, | उपनिषद्ब्रह्मयोगी ६१, ६२ १८६, १९६, २०६, २०७ | उवट १६२ अमरकोष १७, १८, २०, ३५, ३६, ३८- | ऋक्प्रातिशाख्य १०३, ११२, ११४, ४०, ४५, ४६, ५४, ७३, ७६, ८४, १०६, | ११६, १४३, १८६, १९३ १०७, १२१, १४१, १४६, १५२, १६४, | ऋक्सर्वानुक्रमणी १८६ १६७, १६९, १७०, २०६, २०७, २१५, | ऋग्भाष्य १८१, १८६ २१६ | ऋग्वेद ७५, ९२, १२४, १४०, १४८, अर्थशास्त्र २०१ | १६० अलंकारशास्त्रका इतिहास ३६ | ए हिस्ट्री आफ साउथ इण्डिया ६२, अलंकारसर्वस्व १५, १८ | १४३, २०२ अवन्तिसुन्दरीकथा ३४, ९२, १७७, | ऐतरेय ब्राह्मण १२१, १२४ २१८, २१९ | कथासरित्सागर २०२ अष्टाध्यायी २०, २१, २७, ३१, ३५, | कमलाकर १६३ ३६, ३८, ४२, ४३, ४५, ४७, ५३, ५८, | कविकल्पलता १८८ ८०, ८४, १०४, ११३, १२१, १३८, | काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड १४०, १४२, १४५, १४७, १६४, १६५, | इण्डस्ट्रियल रिसर्च २०२ १७२, १७७, १७८, १८४, १९३, १९५, | काठकसंहिता १४८ २१०, २११ | कामधेनु ६१, ७२, १६३, १९६, २०५ आख्यातचन्द्रिका ६०, १४० | कामसूत्र ५४-५६, १२३, १३७ आचार्य दण्डी एवं संस्कृत काव्यशास्त्र |

सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूची २४१ ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क काव्यप्रकाश ८, १५, १८, १६२, १६६, छान्दोग्योपनिषद् ५२ २०१, २२८, २२६ जयमङ्गला (कामसूत्रटीका) १२३, काव्यादर्श ३, १६, १४४ १३७, २०६ काव्यानुशासन १५, १७, १३७ जयमङ्गला (भट्टिटीका) ८२, ८७ काव्यालंकार (भामह) ३, ७-६, १२, जातकमाला २१७ १६, ८५, १२१, १२४, १४७, १५६- जीवानन्द विद्यासागर १४३, १४६ १६०, १६६, १६६, १७२, १७४, १८०, जैमिनीय ब्राह्मण १४८ १८८, १६२, १६६, २००, २०३, २१०, झळकीकरटीका (प्रभा) १६२, १६३, २११, २१३, २१४, २१६, २२३, २२४ २०१ २२५ तत्त्वप्रकाशिका ६३ काव्यालंकार (रुद्रट) १२, १६, ६७, तर्कसङ्ग्रहतारोदय २००, २११ ६६, ७८, ८१, ८५, ८८, ८६, ६६, १२४, तरुणवाचस्पतिटीका ६, २४, २५, ४४, १३४-१३७ ४६, ४७, ५०, ५३, ५५, ५६, ५८, ६१, काव्यालंकारभाष्य १६७, २१० ६८, ७१, ७३, ७५, ७७, ७६, ८०, ८३, काव्यालंकारसार ३६, ८८, १०८, १४०, १४२, १४५, १५१, काव्यालंकारसूत्र, वृत्ति (वामन) १७७, १८३, १८६, १६१, १६४, २०७, १०-१२, १६, ६१, ७२, १८३, १८४, २०८ १६४, १६६, २००, २०६, २२४ तिरुपतिसंस्करण १४१, १५१, १६४ काशिका १७६ तैत्तिरीयब्राह्मण २१५ किरातार्जुनीयम् ८१, ८५-८६, ६४, तैत्तिरीयसंहिता २१४, २२० १०५, ११६, १६४ तैत्तिरीयोपनिषद् ५२ कुमारसम्भव (कालिदास) ६३, ११३ त्रिकाण्डशेष २५ कृष्णमाचार्य २५ दशकुमारचरित १०५ कौषीतकिब्राह्मण १८७,१८६ डॉ० धर्मेन्द्रकुमारगुप्त, काव्यादर्श गीताभाष्यनवाम्बरा १६८ ६२, १४६ गोपथब्राह्मण १२१, २२० धातुपाठ ५८, ६८, ११८, १४०, १४७, घण्टापथ ११६ १७६, १७७ चिन्तामणि २५ ध्यानबिन्दूपनिषद् ६१, ६२ छन्दःशास्त्र १८१, १८४, १८७,१८६, ध्वन्यालोक १८, २२६ १६१ नमिटीका १२, १७, ६६

२४२ काव्यादर्श ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क नाट्यशास्त्र २-५,२०,२६,५०,६२, भोटपाठ १६५ ६४,६७,७८,८१, १५३,१५८,१६०, मनुस्मृति २१६,२२१ १६६,१६८,१७२,१७४,१७६,१८१, मन्दारमरन्दचम्पू १८३ १८६,१८२,१६५,१६७,१६८,२०६, महानारायणोपनिषद् ६३ २०७ महाभारत, गीताप्रेस संस्करण २०६ नादबिन्दूपनिषद् ६२ महाभाष्य ४०,१५८,१७५,१८० नारायणभट्ट १०६,१८६ मामन्दूर शिलालेख १४३ निरुक्त १६४ मेघदूत १८३ निरुक्तके पाँच अध्याय ७६,१२१,१२४ मेदिनीकोष ३,३६,४०,४४,४६,८४, निरुक्त-मीमांसा १७६ ६६,१७०,१७७ नीतिशतक १८२ मेधावी २२३ नृसिंहपुराण ११४ रघुवंश ५३ पाणिनीय शिक्षा १४३ रङ्गराज (रङ्गाचार्य रेड्डी, प्रभा) २५ पाशुपत ब्रह्मोपनिषद् ६१,६२ ५३,७७,१२८,१३४,१४३,१४६ प्रसादिनी ३५,६२,७१,६३,११७, रत्न-दर्पण १४,६०,७३,७५,८१,६७, ११६,१८६,२२३ १०६,१०८,१४०,१७४,२०७ प्राकृतपैङ्गल १०६ रत्नश्री २४,२५,४४,४६-४७,५३, प्रेमचन्द्र तर्कवागीश १४३,१४६ ५५,५६, ५८,६१,७०,७५,७७,७६, प्रेमचन्द्रशर्मा १२८ ८०, ८२, १०६,१०८, ११०,११५, बालप्रिया १६३ १२२,१२६,१३०,१३३,१३४,१४०, बृहदारण्यकोपनिषद् ५२ १४२,१४३,१४५,१५१,१५८,१६८, बृहद्देवता १२४ १७०,१७२,१७३,१७७,१७६,१८६, बृहद्देशी २०६ १६१,१६५,२०१ २०७,२०८ ब्रह्मसूत्र २२० रामाश्रमी १२१,१४५,१४६,२१६ भट्टिकाव्य ८१,८७-८८,११३ रेड्डीसंस्करण १५१ भरतका संगीतसिद्धान्त २०६ ललितविस्तर २११,२१२ भरतकोश २०६ लोचन १६२ भवतोषिणी २५,४१,६०.१०४,१७६ लोल्लट १६ भागुरि ४७,८४ वक्रोक्तिजीवित १५,१८ भावप्रकाश २०२ वनपर्व ११५ भीमसेन १६३ वाक्यपदीय ४०

काव्यदर्श २४३ ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क ग्रन्थनाम पृष्ठाङ्क वाग्भटालंकार ६३ शुक्लयजुःप्रातिशाख्य १११ वाचस्पतिकोष १४५ शृङ्गारतिलक २० वात्स्यायन २११ श्रीमद्भागवत ५७,७६,१०६,११७, वादिटीका (वादी जङ्घालदेव) २४, ११८,२१७,२१८ २६,४६,४७,५३,५५,६,५८,६१,६५ श्रीवत्सलाञ्छन १६३ ६६,६८,६६,७१, ७३,७५,७७,७६, संस्कृत व्याकरणशास्त्रका इतिहास ८०,८३,६८,१०६,१०८,१२६-१३१ १८० १३४,१४०,१४२,१४५,१५१,१७७, संगीतदर्पण २०६ १८६,१६१-१६२,१६४,१६५,२०७, संगीतरत्नाकार २०८ २०८ सभापर्व २२१ बार्तिक ३१,१०४,१३६,१४२,१४५ सरस्वतीकण्ठाभरण (भोज) १४,६०, १६४-१६५,१७५ ६५,८०-८३, ८६,६६, ६७, १०६, वाजसनेयिसंहिता (वासं) ५६ १२४,१३६,१३७,१४०,१४१,१४७, विक्रमोर्वशीय १६२ १६२,१६५,१६८,१७३,१७४,१६४, विशाखिल १६८ २०५,२२७ विश्वकोष १८,२५,२६, सर्वदर्शनसङ्ग्रह २१२ विष्णुधर्मोत्तरपुराण २१८ सायणभाष्य १२१ वृत्तरत्नाकर ४६,१०६,१८६,१६२ सिद्धान्तकौमुदी ४१,६०,१११,११३, वैद्यनाथ १६३ १३६ व्यक्तिविवेक २२६,२२७ सुदर्शना १०१ शतपथब्राह्मण १८७,१८६,१६८ सौन्दरनन्द २११ शब्दकल्पद्रुम २५ हरिवंशपुराण ३८,५७,२१७ शब्दार्णवकोष २०४ हलायुधटीका ( मृतसञ्जीवनी ) शान्तिपर्व २२१ १८२,१८६,१८६,१६० शाबरभाष्य १५८ हृषीकेशग्रन्थावली ६७ शिशुपालवध (माघ) ८५-८७,६१, हैमकोष ७३ ६४,१०५,१४२ शुभं भवतु पुस्तस्याध्येतुरध्यापकस्य च । प्रकाशकस्य मे चापि प्रसादो भूयसा भवेत् ॥

श्री शिवनारायण शास्त्रीके अन्य ग्रन्थ (१) निरुक्तमीमांसा—यास्काचार्यके निरुक्तका सर्वाङ्गीण अध्ययन। डॉ० सिद्धेश्वरवर्माने इस ग्रन्थको 'अद्भुत' कहा है। उत्तरप्रदेश शासन, हरजीमल डालमिया ट्रस्ट ने पुरस्कारोंसे इसे सम्मानित किया है। (२) वैदिक वाङ्मयमें भाषा-चिन्तन—ऋषियोंके भाषा-चिन्तनका ऊह उनके कथनोंके आधारपर किया गया है। इसे भी उत्तरप्रदेश शासनने पुरस्कृत किया है। (३) निरुक्त (१-२, ७ अध्याय)—यह ग्रन्थ निरुक्ताध्यायी छात्रोंके लिए परम उपयोगी है। (४) निरुक्तके पाँच अध्याय—निरुक्तके १-४, ७ अध्यायों तथा तदन्तर्गत निघण्टुके वैज्ञानिक पाठशोध, हिन्दी अनुवाद, शोधात्मक व्याख्या, विस्तृत भूमिका और परिशिष्ट इस ग्रन्थको विद्वानोंके लिये संग्रहणीय बनाते हैं। (५) गीता-भाष्य-नवाम्बरा—शांकर-भाष्यसहित गीताके १-२ अध्यायों के अनुवाद, भाष्य-मर्म-प्रकाशिनी व्याख्या, विशद भूमिका और पारिभाषिक शब्दकोषसे युक्त है। (६) तर्कसंग्रह-तारोदय—हिन्दी अनुवाद, व्याख्या, सरल गम्भीर भूमिका से युक्त यह ग्रन्थ शास्त्रमें प्रवेशार्थियोंके लिये उपयोगी है। (७) सबालप्रबोधन्युपन्यासस्तर्कसङ्ग्रहः—दो अप्रकाशित टीकाओं तथा तर्कसङ्ग्रहका प्रामाणिक पाठ इस ग्रन्थमें सम्पादित किया गया है। (८) ईशोपनिषद्-भाष्य-कुसुमाञ्जली—ईशावास्योपनिषद् तथा इसपर शांकरभाष्यका मर्म पूरे वैदिक साहित्यकी पृष्ठभूमिको ध्यानमें रखते हुए अत्यन्त प्रामाणिक रूपसे सरल सुबोध शैलीमें उद्घाटित किया है। (९) श्रीशङ्कराचार्यचरितकुसुमाञ्जलि—उत्तरप्रदेश संस्कृत अकादमी द्वारा वर्षके सर्वश्रेष्ठ काव्यके रूपमें कालिदास पुरस्कारसे सम्मानित, डॉ० निगमबोधतीर्थके संस्कृत काव्यका सान्वय हिन्दी अनुवाद तथा सम्पादन। (१०) वैयाकरण सिद्धान्तकौमुदी ( भ्वादि ) भवतोषणी—पाणिनिसे भैरवमिश्रावधि आचार्यपरम्पराका समीक्षात्मक अध्ययन तथा धातुपाठका विवेचनात्मक अध्ययन ८२४ पृष्ठोंमें भ्वादिगणके सन्दर्भमें किया गया है। (११) पातञ्जलमहाभाष्य-प्रदीप-प्रकाश—महाभाष्य और कैयटकृत प्रदीपकी सानुवाद हिन्दी व्याख्यासहित विविध परिशिष्टोंसे युक्त प्रथम भाग यन्त्रस्थ है।

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