खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] अविसंवादित्व का खण्डन १६५ तदर्थक्रियादर्शनात् तदवधारणमिति चेन्न । विनाप्यर्थक्रियां तद्दर्शनसम्भवात् । अर्थक्रियाप्रमितिरभिधित्सितेति तु दूषितमेव, प्रमाया एव निरूप्यमाणत्वात् । अभिप्रायविसंवादात् प्रमायां सर्वमुच्यत इति चेन्न । तदा अभिप्रायविसंवादस्य स्वप्नादिप्रत्ययेऽपि सम्भवात् । कालान्तराविसंवादस्य च दुरवधारणत्वात् । एतेन 'प्राप्त्यादियोग्यता अविसंवादार्थ इत्यपि निरस्तम् । दुराबाध इव चायं धर्मकीर्तेः पन्था इत्यवहितेन भाव्यमिहेति । है या मुद्रादिरूपसे, इसका अवधारण नहीं हो सकता। अतः रजत में होनेवाले 'इदं रजतम्' इस ज्ञान में भी अव्याप्ति हो जायगी । समर्थन—अङ्गुलीयरूप अर्थक्रिया के दर्शन से ही रजतत्व का अवधारण करेंगे । खंडन—जैसे रजतत्व के बिना भी रजतत्व का भ्रम होता है, वैसे ही अर्थक्रियाकारित्व के बिना भी अर्थक्रियाकारित्व का भ्रम हो सकता है । अतः अर्थक्रिया के दर्शन मात्र से रजतत्व का अनुमान नहीं हो सकता । यदि कहें कि अर्थक्रिया की प्रमिति से रजतत्व का अवधारण करेंगे, तो वह भी नहीं कह सकते, कारण प्रमिति का अभीतक निर्धारण ही नहीं हुआ है । समर्थन—अभिप्राय ( इच्छा या प्रवृत्ति ) के अविसंवाद से सम्पूर्ण ज्ञान प्रमा कहे जाते हैं । खण्डन—वह अविसंवाद ज्ञानकाल में अभिप्रेत है या सभी कालों में ? यदि कहें कि ज्ञानकाल में, तो भ्रमस्थल में भी ज्ञानकाल में अविसंवाद होने से भ्रम में अतिव्याप्ति हो जायगी । यदि कहें कि सभी कालों में अविसंवाद अभिप्रेत है, तो 'इस ज्ञान में कदापि अविसंवाद नहीं होगा' यह बात दुर्ज्ञेय है । प्रत्युत सम्भव है कि स्वप्नकाल में सर्वविध ज्ञानों में विसंवाद हो, अतः लक्षण में असम्भव दोष हो जायगा । समर्थन—प्राप्तियोग्यता अविसंवाद है और उससे युक्त अनुभव प्रमा है । खंडन—यदि ज्ञानकालमें प्राप्ति की योग्यता कहें, तो वह भ्रम में भी है, अतः उसमें अतिव्याप्ति हो जायगी । यदि सर्वकाल में प्राप्ति की योग्यता कहें, तो उसका अवधारण प्रमा में भी नहीं हो सकता, अतः असंभव हो जायगा । इसलिए प्राप्ति की योग्यता को प्रमा मानना भी असङ्गत है । धर्मकीर्ति के इस प्रमालक्षण का खण्डन मन्दबुद्धियों को अशक्य-सा प्रतीत होता है । अतः इससे सावधान रहना चाहिए ।