भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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पृष्ठ 197

१८० सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम ओमिति चेत्; तत्किमोमित्यभिधायैव निवृत्तो भवान् ? आकलितं किलास्माभिः सामग्र्यपि करणमित्यत्र न श्रदधतः प्रणवपूर्विकां श्रुतिमेव काञ्चित्पठित्वा श्रद्धा- पयिष्यति भवानस्मानिति । न सामग्री कारणम्, किन्तु तदेकदेशो नानाभूतः प्रत्येकं तथा । सामग्री तु 'यदनन्तरं कार्यं भवत्येव'इत्येतावन्मात्ररूपेति चेन्न । एतादृशस्य सामग्रीलक्षणस्य करणेऽपि सत्त्वात् करणस्यापि सामग्रीत्वापातात्, क्रियाया विभागादौ विभागस्य च संयोगनाशादिं प्रति तथात्वापत्तेः । यच्च प्रतिसामग्र्येकदेशं नियतप्राग्भावादि कारणलक्षणमिष्यते, तत्सामग्र्या- मपीति कथं तदकारणता ? प्राक्कालमन्तर्भाव्य सामग्री, तादृश्याश्च तस्याः प्राक्सत्त्वमेव नास्तीति चेन्न । तत एव प्राक्कालस्याकारणत्वात् कारणसामग्र्यां तदनिवेशात् । करणत्व का प्रसङ्ग हो जायगा । यदि आप 'ओम्' शब्द का उच्चारणकर सामग्री का करणत्व स्वीकार करायें, तो क्या आप 'ओम्' कहकर ही कृतकृत्य हो गये ? हमने तो यही समझा कि बिना किसी युक्ति के सामग्री को करण मानने में श्रद्धा न रखने- वाले हम लोगो को आप प्रणवपूर्वक कोई श्रुतिवचन पढ़कर श्रद्धा करा देंगे । समर्थन—सामग्री कारण नहीं, बल्कि उसका एकदेश जो, कि समवायी, असमवायी आदि अनेकविध है, कुठारादि प्रत्येक कारण है । जिसके अनन्तर उसरकाल में कार्य अवश्य हो, वह सामग्री है । अतः सामग्री में क्रिया के साथ अयोगव्यवच्छेद से युक्त कार्यकारणभावरूप सम्बन्ध न होने से अतिव्याप्ति नहीं है । खण्डन--सामग्री का यह लक्षण करण में भी है, अतः करण में सामग्री के लक्षण की अतिव्याप्ति हो जायगी । किञ्च—क्रिया विभाग की और विभाग संयोग के नाश की सामग्री हो जायगा । किञ्च—नियतपूर्ववर्तित्वरूप जो कारणत्व-सामग्री के एकदेश में है, वह सामग्री में भी है ही । अतः 'सामग्री कारण नहीं है' यह कथन भी उचित नहीं है । समर्थन—सामग्री में अन्तर्भूत प्राक्काल भी है और उसमें प्राक्सत्त्वरूप कारणत्व नहीं है । अतः प्राक्कालघटित सामग्री में प्राक्सत्त्वरूप कारणत्व नहीं है । खण्डन—प्राक्काल में पूर्वक्षणवृत्तित्व का असत्त्व होने से वह कारण ही नहीं है। अतः कारणसमूहरूप सामग्री में प्राक्काल का प्रवेश हो ही नहीं सकता ।