भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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परिच्छेद ] तृतीय करण-लक्षण का खण्डन १६१ तृतीय-करणलक्षण-खण्डनम् अथ यां प्रमां यद्वानैव जनयति, तस्यां तत्करणमिति । मैवम्; कौपीनाच्छाद- नादेरपि करणत्वप्रसङ्गात् । यज्जातिकामिति चेत् , मैवम् । परोक्षत्वजातिकां प्रमां लिङ्गवानेव शब्दवानेव वा जनयतीति नियमाभावात् तस्याकरणत्वप्रसङ्गात् । साक्षात्कारित्वानुमितित्वादयो जातिभेदा विवक्षिता इति चेन्न । प्रत्येकमुपादाने ऽंशाव्याप्तेः । सम्भूयोपादाने सर्वाव्याप्तेः । अनियमेनोपादाने च लक्षणाननुगमापातादिति ! तृतीय करण-लक्षण का खण्डन समर्थन – प्रमाता जिससे युक्त होकर जिस प्रमा को करता है, उस प्रमा में वह करण है । खंडन---यत्किञ्चित् प्रत्यक्षादि प्रमा कौपीन-आच्छादन से युक्त भी प्रमाता करता है, तब तो कौपीन-आच्छादन में करणत्व-लक्षण की अतिव्याप्ति हो जायगी । समर्थन—‘यज्जातीय प्रमा को यत्-युक्त ही प्रमाता करे, तज्जातीय प्रमा में वह करण है', ऐसा लक्षण करेंगे । एवञ्च वह प्रत्यक्षजातीय प्रमा कौपीनादि से रहित भी करता है, अतः कौपीनादि में अतिव्याप्ति नहीं होगी । खंडन—परोक्षजातीय शाब्दरूप प्रमा को लिङ्गपरामर्श से रहित भी प्रमाता करता है, अतः लिङ्गपरामर्श में अव्याप्ति हो जायगी । समर्थन—इस लक्षण में परोक्षत्व का निवेश नहीं है, किन्तु प्रत्यक्षत्व, अनु- मितित्व, उपमितित्व और शाब्दत्वरूप जातियों का निवेश है । अतः लिङ्गपरामर्श में अव्याप्ति नहीं होगी । खण्डन—लक्षण में इन जातियों का किसी भी रूप से निवेश नहीं हो सकता । यदि प्रत्यक्षत्वादि एक का निवेश करें, अर्थात् प्रत्यक्षजातीय प्रमा को जिससे युक्त हो प्रमाता करे, वह प्रमाण है—ऐसा लक्षण करें, तो परामर्श में अव्याप्ति हो जायगी । यदि सम्पूर्ण का निवेश करें, 'अर्थात् प्रत्यक्ष-अनुमिति-उपमिति- शाब्दप्रमाओं को जिससे युक्त होकर प्रमाता करे, वह प्रत्यक्ष प्रमा है,' ऐसा लक्षण करें, तो सम्पूर्ण प्रमा को चक्षुरादि किसीसे युक्त प्रमाता नहीं करता । अतः सर्वत्र असम्भव हो जायगा । यदि 'प्रत्यक्ष प्रमा को जिससे युक्त ही प्रमाता करे, अनुमिति प्रमा को जिससे युक्त होकर प्रमाता करे, अथवा उपमिति आदि स्थलों में विशेषरूप से उपादान करे, वह सब प्रमाण हैं'—ऐसा निवेश करें; तो अनेक लक्षण होने से अननुगम हो जायगा ।