खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८४ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ द्वितीय
षणामिधानानां योग्यो भवत्येवेति तदान्येषां क्रमभाविनामभावात्सैवातिव्याप्तिः । सर्वस्मिन् योग्यकाल इति चेन्न । दूषणानन्तरकालस्य योग्यकालत्वाभ्युप- गमेऽव्याप्तिः । दूषणपूर्वकालस्य तथाऽभिमतत्वे च दूषणानन्तरभाविन्या विशेषणोक्ति- व्यक्तेस्तदानीमभावात् पूर्ववदतिव्याप्तिः । सर्वस्यास्तज्जातीयाया विशेषणस्योक्तेरभावो विवक्षित इति चेन्न । व्यक्तीनामभावप्रतियोगिभूतानां सर्वासां पृथक् पृथक् प्रमाणेन केनापि अस्मदादृशा प्रत्येतुमशक्यतयाऽभावानिरूपणेन लक्षणस्याज्ञानादसिद्धिप्रसङ्गात् । सामान्य- प्रत्यासत्त्या व्यक्तयः प्रतिभान्तीति निरस्तमनुमानावसरे । अन्य विशेषण के अभिधान के भी योग्य है ही और एक विशेषण के अभिधान में अन्य विशेषण की अनुक्ति भी है। अतः पूर्वोक्त अतिव्याप्ति तदवस्थ ही है। समर्थन—'सम्पूर्ण योग्य काल में अनुक्त जो विशेषण, तादृश विशेषणवत्त्वरूप से स्वोक्त परदूषित साध्यभाग का अभिधान प्रतिज्ञान्तर है' ऐसा लक्षण करेंगे। उक्त वाक्य में सम्पूर्ण योग्यकाल में अनुक्त विशेषण नहीं है, अतः अतिव्याप्ति नहीं। खंडन—जहाँ दूषणदान से उत्तर काल में विशेषण का अभिधान है, वहाँ लक्ष्य में अव्याप्ति हो जायगी, क्योंकि वहाँ भी योग्यकाल में विशेषण उक्त ही है, अनुक्त नहीं। समर्थन—'दूषणदान से पूर्वकाल में अनुक्त जो विशेषण, तादृश विशेषणवत्त्व रूप से स्वोक्त परदूषित साध्यभाग का अभिधान प्रतिज्ञान्तर है' ऐसा कहेंगे। खंडन—प्रत्यु- च्चारण शब्द भिन्न-भिन्न होने से दूषण के उत्तर काल में उक्त विशेषण-व्यक्ति भी पूर्वकाल में अनुक्त होने से पूर्वोक्त स्थल में (जहाँ सविशेषण ही निर्विशेषण-भ्रम से वादी द्वारा दूषित होने पर पूर्वोक्त विशेषणवत्त्व रूप से कहा गया हो, वहाँ) अतिव्याप्ति हो जायगी। समर्थन—'दूषण से पूर्व उक्त जो विशेषण, तत्सजातीय जो यावत् विशेषण, उन सबसे भिन्न जो विशेषण, तादृश विशेषणवत्त्वरूप से स्वोक्त परदूषित साध्यभाग का अभिधान प्रतिज्ञान्तर है' ऐसा लक्षण करेंगे। खण्डन—उक्त लक्षण में अभाव के प्रतियोगी सम्पूर्ण विशेषण-व्यक्तियों का हम लोगों को किसी भी प्रमाण से ज्ञान न होने से अभाव दुर्ज्ञेय हो जाने के कारण लक्षण ही असिद्ध हो जायगा। सामान्यलक्षणा से सभी प्रतियोगी व्यक्तियों का ज्ञान नहीं हो सकता, कारण सामान्यलक्षणा का खण्डन हम अनुमान- खण्डन के अवसर पर कर ही चुके हैं।