भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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पृष्ठ 543

[रिच्छेद ] वर्तमानत्वादि-लक्षणों का खण्डन ४२१ व्यवच्छिन्नो वर्तत इति प्रतीतः, तेनैवोपाधिना तत एव व्यवच्छिन्नो वृत्त इति वर्तिष्यत इति च कदाचित् ज्ञायते । ननु सत्यमेतत्, परं यदा तदुपाधिसम्बन्धस्तस्य स्वरूपेणावतिष्ठमान- स्तदा वर्तमानप्रत्ययः, यदा स एव विनष्टो भवति तदा भूतप्रत्ययः, यदाऽनागत- स्तदा भविष्यत्प्रत्यय इति । नैतदस्ति ; यद्यत्र लटो विवक्षितोऽर्थस्तदा तज्ज्ञानस्यैव तज्ज्ञानोपायत्वमिति आत्माश्रयानवस्थयोरन्यतरप्रसङ्गः । विनष्टादिशब्दाश्च अतीतादिपर्यायास्तेषां सर्वेषामेवार्थे निरूप्यमाणे , तन्मध्यपतितमेकं शब्दं प्रयुज्य तन्निर्वृक्तिं कुर्वाणः श्लाघनीयप्रज्ञो मातापितृमानसि । क्रियावच्छिन्नः कालो वर्तमानः, तत्प्रागभावावच्छिन्नो भूतः, तत्प्रध्वंसाव- दिवस पूर्वकाल में अन्य दिवसों से व्यवच्छिन्न होकर 'वर्तते' इस प्रतीति का विषय था, उसी उपाधि से उसी अन्य दिवस से व्यावृत्त वह दिवस किसी काल में 'वृत्तः, वर्तिष्यते' इन प्रतीतियों का भी विषय होता है। समर्थन—आपका यह कथन सत्य है, किन्तु जिस काल में उपाधि का उक्त सम्बन्ध स्वरूपतः वर्तमान है, उस काल में 'वर्तते' ऐसी प्रतीति होती है; जिस काल में वह उपाधि नष्ट हो जाती है, उस काल में 'भूतः' इत्याकारक प्रतीति होती है और जब वह उपाधि अनागत रहती है, तब 'भविष्यति' ऐसी प्रतीति होती है । खंडन—यह कथन भी अयुक्त ही है, कारण लक्षणघटक 'वर्तमान' शब्द का अर्थ वर्तमान काल ही है । अतः वर्तमान काल के लक्षण में वर्तमान काल घटक हुआ । वह लक्षणघटक वर्तमान यदि लक्ष्यभूभ वर्तमानरूप ही है, तो आत्माश्रय और यदि अन्य है, तो उसके लक्षण में अन्य वर्तमान घटक है, इस तरह अनवस्था हो जायगी । किञ्च—विनष्ट, अतीत आदि शब्दों का एक ही अर्थ है । अतः उन्हीं सब शब्दों के अर्थों के निरूपण के समय यदि आप विनष्टघटित अतीत का लक्षण करते हों, तो आपकी बुद्धि प्रशंसनीय है और आप माता-पिता आदि गुरुजनों से युक्त हैं। अर्थात् यदि लक्ष्य और लक्षणघटक 'अतीत', 'विनष्ट' शब्दों का अर्थ एक ही है, तो आत्माश्रय और यदि लक्षणघटक अतीत शब्द का अर्थ लक्ष्य से अन्य है, तो इस प्रकार उत्तरोत्तर निवेश से अनवस्था हो जायगी । समर्थन—पाकादि क्रिया से अवच्छिन्न काल वर्तमान है और क्रिया के प्रागभाव ६६