खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Page Header: परिच्छेद ] \qquad भावाभाव-विरोध का खण्डन \qquad ५३७]
वा तादात्म्यं वा ? न प्रथमः ; प्रमाणाभावेन तथाविधतत्कार्यानङ्गीकारात् । न द्वितीयः ; प्रतिक्षेपशब्दार्थस्य उभयानुगतस्यानिर्वचनात् । यत्रैकस्य सत्त्वं तत्रापरस्यासत्त्वं नियमेन यत्स विरोधस्तयोरिति चेन्न । सत्त्वासत्त्वयोरेकापराश्रयत्वे वैयधिकरण्यात् । सम्बन्धस्य तद्व्यतिरिक्तत्वे एकसत्त्वस्यैव चापरासत्त्वात्मकतया स्वीकारेण यत्रैकस्य सत्त्वं तत्रैकस्य सत्त्वमिति वचनार्थप्रसङ्गेन पौनरुक्त्यापातात् । यत्र घटाभाव इत्यत्र खल्वयमर्थो यन्नाम ? यस्याऽऽधेयतया सम्बन्धी घटा- भावः । तत्र घटो नास्तीत्यस्याप्ययमर्थः—तस्याऽऽधेयतया सम्बन्धी घटाभाव इति । यत्र घट इत्यस्य कोऽर्थः ? यस्याऽऽधेयतया सम्बन्धी घटः । तत्र घटाभावो नास्तीति कोऽर्थः ? तस्याऽऽधेयतया सम्बन्धी घटाभावसम्बन्धनिषेधः । घटाभावसम्बन्धस्य घटाभावात्मकतया घटाभावनिषेधस्यापि घटात्मकतेति । अर्थात् भाव के प्रतिक्षेप का तादात्म्य अभावरूप है और अभाव के प्रतिक्षेप का तादात्म्य भावरूप है। अतः उभयानुगत ( एकरूप ) प्रतिक्षेप का निर्वचन नहीं हो सकता । समर्थन—'जहां एक ( भाव या अभाव ) का सत्त्व हो, वहाँ अपर (अभाव- या भाव ) का नियम से जो असत्त्व है, वही भावाभाव का विरोध है।' खण्डन— सत्त्व तो एक में रहेगा और असत्त्व दूसरे में । अतः सत्त्व और असत्त्व का सामाना- धिकरण्य न होने से असम्भव हो जायगा । यदि सत्त्व-शब्द का 'सम्बन्ध' तथा असत्त्व-शब्द का 'तदभाव' अर्थ करें और इस तरह उन एकापर प्रतियोगियों का सामानाधिकरण्य संभव मानें, तो वह भी ठीक नहीं । कारण इस तरह एक के सत्त्व को अपर के असत्त्वरूप ( घट के सत्त्व को घटाभाव के असत्त्वरूप ) मान लिया गया । एवञ्च घटाभाव के असत्त्व का घटसत्त्व में ही पर्यवसान होने से उसका यही अर्थ हुआ कि 'जहाँ एक का सत्त्व है, वहाँ एक का सत्त्व है।' तथाच यह पौनरुक्त्य हो जायगा । फलतः प्रतियोगी के अभिधान में अपर का अनभिधान होने से अव्याप्ति हो जायगी । देखिये, 'जहाँ घटाभाव है' इसका अर्थ यह है कि जिसका आधेयरूप से सम्बन्धी घटाभाव है । 'वहाँ घट नहीं है' इस वाक्य का भी यही अर्थ है कि उसका आधेयरूप से सम्बन्धी घटाभाव है। 'जहां घट है' इसका क्या अर्थ है ? जिसका आधेयरूप से सम्बन्धी घट है । 'वहाँ घटाभाव नहीं है' इसका क्या अर्थ है ? उसका आधेयरूप से सम्बन्धी घटाभावसम्बन्ध का निषेध है । घटाभाव का