कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Kularnava Tantra with Hindi Commentary
भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ
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साधनमाला ६ स्थित रहते हैं और चारों प्रकार की मुक्ति वह प्राप्त करता है। जो पाँच सौ बार जप करता है, उसके फल का वर्णन करने में मैं समर्थ नहीं हूं। अतएव हे कुलनायिके ! सब प्रयत्न करके, सब अवस्थाओं में, सदैव श्रीप्रासादपरा मन्त्र का भुक्ति एवं मुक्ति के लिए जप करना चाहिये । इस प्रकार हे देवि ! ऊर्ध्वाम्नाय और श्रीप्रासादपरा मन्त्र की कुछ महिमा मैंने तुमसे कही। अब तुम क्या सुनना चाहती हो ?