कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary
महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा
पृष्ठ 125, कुल 268 में से
संदर्भ में पढ़ें( १०६ ) to this उपपन्नचापलः । उपपन्नं-( उप+√पद्+क्तः ) संभाव्यं; प्राप्तम् is produced or aroused. चापलं-( चपल+अण् ) चपलस्य भावः चापलम् ( धृष्टता ) agitation, want of patience उपपन्नं चापलं यस्य स उपपन्नचापलः i. e, who has become curious अयं जनः- i. e, I myself बहुक्षमां-बहुः क्षमा यस्यां सा बहुक्षमा, ताम् or बहु क्षाम्यतीति बहुक्षमा ताम् One possessed of great forbearance, who forgives much who is capable of bearing great hardships It gives the reason why Shiva makes bold to make enquiry प्रष्टुमनाः-( √प्रच्छ्+तुमुन्+मनाः ) प्रष्टुं मनो यस्य स प्रष्टुमना desirous of asking something. The nasal of the infinitive is dropped before काम and मनस् by ' तुं काममनसोरपि ' । रहस्यं-( रहस्+यत् ) रहसि भवं रहस्यं ( गोप्यं ) a secret प्रतिवक्तुं-( प्रति+√वच्+तुमुन् ) to tell me Some books read प्रतिबोधयिष्यसि ( thou wilt kindly let me know) instead of प्रतिवक्तुमर्हसि ॥ ४० ॥ Change of Voice :-( हे ) तपोधने, अतः अत्र द्विजाति- भावाद् उपपन्नचापलेन अनेन जनेन बहुक्षमां भवतीं किञ्चित् प्रष्टुमनसा ( भूयते ), चेद् रहस्येन न ( भूयते ) तर्हि ( त्वया ) प्रतिवक्तुं अर्ह्यते ॥ ४० ॥ Hindi Translation :-हे तपस्विनि, इस लिये इस ( तुम्हारी तपस्या ) के बारे में, ब्राह्मण होने के कारण प्रगल्भ हुआ यह व्यक्ति ( मैं ) अत्यन्त सहनशील आप से कुछ पूछने की इच्छा वाला है, यदि कोई गुप्त बात न हो तो आप उत्तर देने की कृपा करें ॥ ४० ॥