भारतकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( २०१ ) of all the three worlds and though of terrible form he is auspicious. When it is so the remarks about Shiva by the ascetic do not hold good. This verse is a reply to verses 66, 67 and 68. 77. CHANGE OF VOICE :—तेन अकिंचनेन सता संपदां प्रभवेण ( भूयते ), पितृवनगोचरेण ( सता ) त्रिलोकनाथेन ( भूयते ), तं भीमरूपं ( सन्तं ) ( जनाः ) शिव इति उदीरयन्ति , पिनाकिनः याथार्थ्यविद्भि न भूयते ॥ ७७ ॥ HINDI TRANSLATION —वह निर्धन होते हुए भी सम्पत्तियों का उत्पत्ति स्थान है, मृतकों की भूमि में रहता हुआ भी तीनों लोकों का स्वामी है, वह भयङ्कर आकार वाला भी लोगों में कल्याणकारी कहा जाता है, शिव की वास्तविकता को जानने वाले ( पुरुष ) नहीं हैं ॥ ७७ ॥ ENGLISH TRANSLATION —Though poor, he is the source of wealth, living in the cemetery ground, he is the lord of the three worlds, being of terrible form, he is called auspicious. There is none who knows the reality about the Pinaka-holder (ie, Shiva) 77 PURPORT IN SANSKRIT :—यद्यपि शिवो भूषणवस्त्रादिभिः रहितः स्वयं निर्धनः परं स सर्वप्रकारकाणां धनानामुत्पादकः, यद्यपि स गृहहीन श्मशानवासी तथापि स त्रयाणामपि लोकानां प्रभुः, एवमेव च यद्यपि सर्पादिभिरावृतो भयानकरूपः परं स शिवः ( कल्याणकारी ) कथ्यते । एतेन ज्ञायते यत्संसारे शिवस्य याथार्थ्येन ज्ञातारो न सन्ति । तच्च कथनम्प्ययथात- थम् ॥ ७७ ॥