भारतकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( २४० ) (b) यदा पार्वती ब्रह्मचारिवेषधारिणम् शिवम् " इतो गमिष्यामीति कथयित्वा गन्तुमुद्यताऽभवत् तदा शिवः तां स्वरूपमास्थाय समाललम्बे । तदा तं देवं शिवम् वीक्ष्य दृष्ट्वा वेपथुमती कम्पयुक्ता सरसांगयष्टिः स्विन्नगात्री महादेवदर्शनेन देव्याः सात्त्विकभावोदय उक्तः । निक्षेप- णाय अन्यत्र विन्यासाय उद्धृतं पदम् उद्वहन्ती धारयन्ती शैलाधिराजतनया पर्वतराजकन्या मार्गाचल व्यतिकराकुलिता मार्गे अचलः तस्य व्यतिकरेण समाहत्या अवरोधेनेति यावत् आकुलिता संभ्रमिता सिन्धुः नदी इव न ययौ नागच्छन् न तस्थौ लज्ज- येतिभावः । गमनोत्सुकापि पार्वती शिवसान्निध्येन कि कर्तव्यविमूढा जाता । Ans II (a) सबसे पहले यह तुम्हारी और दूसरी हंसी होगी कि श्रेष्ठ हाथी पर चढ़ने योग्य विवाहित तुमको (शिवजी के) बुड्ढे बैल पर बैठे देखकर बडे आदमी मुस्कराने लगेंगे । Then, first of all, there will be another humiliation for thee, when great men will have smiling countenances on seeing thee, fit to be borne by a lordly elephant, riding an old bull, after marriage (b) जो अत्यधिक मूल्यवाली सेज पर करवट लेने से गिरे हुये अपने बालों के फूलों से भी कष्ट पाती थी वह अब अपनी लता के समान भुजा की तकिया लगाकर नंगी भूमि पर ही सोती और बैठती थी । She who would feel pain even by the flowers dropped down from her hair by the rollings on her