कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary
महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४१ ) costly bed slept and sat on the bare earth using her creeper-like arm as a pillow Ans III (a) जब ब्रह्मचारी का रूप धारण कर शङ्करजी ने पार्वती को बहुतेरा समझाया और अपना ( शङ्करजी का ) दोष भी उनको बताया और यह भी कहा कि ऐसे पति की इच्छा न करो तब पार्वती जी ने कहा कि अब रहने दो वाद विवाद मत करो । मैं उनके गुण व अवगुण की परवाह नहीं करती क्योंकि इच्छा के अनुसार कार्य करने वाला व्यक्ति बदनामी की परवाह नहीं करता । (b) ब्रह्मचारि वेषधारी शिव ने पार्वती से तपस्या करने का कारण पूछा । और अनेकों तर्कनायें करते हुए कहा कि यदि हे पार्वती तुम पति पाने की इच्छा से तपस्या कर रही हो तो व्यर्थ है क्योकि रत्नों की खोज लोग स्वयम् करते हैं और रत्न किसी की खोज नहीं करता । अर्थात् हे पार्वती तुम तो स्त्री हो तुम्हें पाने के वास्ते तो लोग स्वयम् प्रयत्न करेंगे तुम पति खोजने के वास्ते नाहक तपस्या कर रही हो । (c) जब पार्वती ने तपस्या करने का पूर्ण निश्चय कर लिया उस समय उनकी माता ने उनके निश्चय से उनको हटाना चाहा और उसी संबंध में समझाती हुई उन्होने कहा कि तुम्हारे कोमल शरीर तथा कठिन तपस्या में बड़ा अन्तर है। कमल का फूल भौंरे का ही बोझ संभाल सकता है पक्षियों का नहीं अर्थात् तुम तपस्या के कठिन दुःख को नहीं सहन कर सकती।